Earthing kya hota he ? Earthing kyo jaruri hota he?

Earthing

दोस्तो आप ने अक्सर Earthing का नाम सुना ही होगा, electricity की दुनिया मे अर्थिंग का बहोत ही बड़ा मूल्य होता है, जहाँ पर इलेक्ट्रिसिटी संबधित कुछ काम होता है वहाँ Earthing जरूर होता ही है। हमारे घर से लेकर बड़ी बड़ी इमारते तथा कारखानों में करना पड़ता है, क्या आप जानते हो कि Earthing क्यों किया जाता है? और Earthing क्यो करना बेहद जरूरी है? पिछली पोस्ट QR CODE के बारे थी आज हम अर्थिंग के बारे में जानेंगे।

अगर नही तो आज की पोस्ट में में आपको earthing के बारे में सबकुछ बताऊंगा आशा करता हु की इस पोस्ट को पूरा पढ़कर आप अर्थिंग के बारे में सब कुछ जान जाओगे।

दोस्तो शुरू करने से पहले बिजली का एक जरुरी नियम आपको जरूर जानना चाहिये कि ” बिजली Ground होने के लिये सबसे शॉर्टकट वाला रास्ता ढूंढती है” याने की अगर बिजली के ग्राउंड होने के लिये हम दो सर्किट तैयार करे और बिजली को उसमे से प्रवाहित करे तो जो सबसे कम लंबाई की सर्किट होगी बिजली उसमे से ही प्रवाहित होगी। परंतु ये Ground क्या होता है?

Ground क्या है?

ग्राउंड याने की बिजली का भूमिग्रस्त होना, जब बिजली जमीन में समाकर डिस्चार्ज हो जाती है तो उसे इलेक्ट्रिसिटी की भाषा मे Electricity Ground होना कहते है।

दोस्तों इलेक्ट्रिसिटी हमारे लिए फायदेमंद तो है ही पर इसके नुकसान भी ज्यादा ही होते है ,अगर सलामती न बरती जाये तो इलेक्ट्रिसिटी हमारी जान भी ले सकती है, अब हम इलेक्ट्रिसिटी से दूर रहे ये तो हो नही सकता, क्योंकि इलेक्ट्रिसिटी हमारे जीवन का हिस्सा बन चूका है, अँधेरे में लाइट ,गर्मी में पंखा, समय के अनुसार हम इस का भरपूर उपयोग करते है।

हमारे आस पास इलेक्ट्रिसिटी का इतना जंजाल है की हम जाने अनजाने में भी उसका उपयोग कर लेते है, इसके साथ साथ जोखम भी बढ़ता चला जाता है, इस लिए सलामती का कोई रास्ता हमे जरूर अपनाना चाहिए जिससे हम और हमारे अपने इलेक्ट्रिसिटी से सुरक्षित रहे सके इसलिए हमें इन सब से बचने के लिए अपने घर में अर्थिंग जरूर करना चाहिए पर पहले जानते हे एर्थिंग हे क्या?

अर्थिंग क्या हे?(what is earthing?):

हमारे आस पास अपने घर में इलेक्ट्रिसिटी के इतने उपकरण होते है की कभी न कभी हम उसका उपयोग कर ही रहे होते है, इसलिए इलेक्ट्रिसिटी का उपकरण हमारे शरीर के संपर्क में होते है, और इसलिये जब कभी उपकरण में फॉल्ट होता है  तब उपकरण की बॉडी में करंट आ जाता है, अगर उस समय हम उपकरण के संपर्क में होते है तो यह करंट हमारे शरीर में से गुजरता हे और हमें Electrical Shock लगता है, कभी कभी ये shock जानलेवा भी हो जाते है, इसलिये safety के लिये हमे अर्थिंग करनी चाहिए, अर्थिंग करने से जो शॉक हमे लगने वाला होता है वह हमारे शरीर में जाने की बजाए ग्राउंड हो जाता हे, याने की जमीन में उतर जाता हे और हमे करंट नही लगता।

जैसा की मेने आपको पहले ही बताया की इलेक्ट्रीसिटी हमेशा जल्दी से जमीन में जाने का रास्ता तलाश करती है, और यहां पर उसके और जमीन के बीच में हम है, अगर इसी समय इलेक्ट्रिसिटी के पास अगर दूसरा सीधा जमीन में जाने का रास्ता मौजूद हो तो वह दूसरे रस्ते से ही गुजरती है, और इलेक्ट्रीसिटी हमारे शरीर से नहीं गुजरती जिससे हमारा बचाव हो जाता है।

आसान शब्दो में कहे तो अर्थिंग याने इलेक्ट्रिकल उपकरण का जमीन के साथ जुड़ाव।

अर्थिंग कैसे करे?:

जैसा की मैंने कहाँ की अर्थिंग याने उपकरण का जमीन से जुड़ाव, अर्थिंग करने के लिए जमीन में एक गड्ढा किया जाता है, उसमे वाहक की तौर पर कोई धातु ले और गड्ढे में गाड़ दिया जाता है, धातु से केबल कनेक्ट कर के जमीन से बाहर निकाली जाती है, और उसे इलेक्ट्रिकल उपकरण से जोड़ दिया जाता है, गड्ढे में कोयला और नमक भी डाला जाता है, कोयला जमीन में नमी बनाये रखता हे और नमक रेसिस्टेन्स कम करता है, इसके लिये जरुरी है की गड्ढे के लिये पसंद की हुई जमीन में नमी हो, क्योकि नमीवाली जमीन अच्छा अर्थिंग प्रदान करती है, इसके लिये गड्ढे की गहराई 3-5 फ़ीट होनी चाहिये,और बहार से पानी देने की व्यवस्था भी हो तो और बढ़िया है।

अर्थिंग के प्रकार:

  1. पाइप अर्थिंग (Pipe earthing)
  2. प्लेट अर्थिंग (Plate earthing)

चलिये दोस्तों अब हम दोनों प्रकार के बारे में अब कुछ विस्तार से जानते है।

1. पाइप अर्थिंग (Pipe earthing):

पाइप अर्थिंग (Pipe earthing) में एक 2.5 मीटर की गेल्वेनाइज पाइप को 3 मीटर के गड्ढे में गाड़ा जाता है। पाइप का एक सिरा जमीन के बाहरी तरफ रखा जाता है, और गड्ढे में कोयला ,नमक और काली मिटटी जो अर्थिंग के लिये बहोत अच्छी मानी जाती है, इन तीनो को मिक्स कर पाइप को गाड़ दिया जाता है, और उसके ऊपर की तरफ एक टंकी बनाई जाती है, जिसमे कनेक्टर रखा जाता है, जिससे नट बोल्ट की मदद से अर्थिंग करनेवाले उपकरण को copper wire या cable की मदद से जोड़ा जाता है, टंकी में एक पानी का नल लगाया जाता है।  जिससे कभी कभी गर्मी के दिनों में जमीन में पानी पहोचाया जाता हे जिससे अर्थिंग मजबूत और अच्छा बनता है।

2.प्लेट अर्थिंग (Plate earthing):

प्लेट अर्थिंग (Plate earthing) में एक 2.5*2.5 ft गेल्वेनाइस प्लेट को किसी copper wire या cable से गेस वेल्डिंग या नट बोल्ट से जॉइंट कर जमीन में गाड़ा  जाता है. और गड्ढे में कोयला और नमक मिटटी के साथ प्लेट को गाड़ा जाता है, और उससे जोड़े हुए वाहक को जमीन से बहार निकाला जाता है,वहां पर एक टंकी बनाई जाती है, और वहां से जिस उपकरण को अर्थिंग देना हो उसकी बॉडी पर कनेक्ट किया जाता है।  

इसके अलावा अर्थिंग को हाउस वायरिंग के साथ भी जोड़ा जाता है,क्योकि पुरे घर में जितने भी इलेक्ट्रिकल उपकरण होंगे उससे वही अर्थिंग जुड़ जाता है, इससे कभी भी हमारा उपकरण अगर बॉडी शार्ट हो जाता है तब वही उपकरण की बॉडी तक पहोचा करंट सीधे सीधे जमीन में पहोंच जाता है, और हमारा बचाव हो पाता है।

निष्कर्ष:

दोस्तों इस पोस्ट द्वारा हमने जाना की Earthing क्या है? Earthing कैसे किया जाता है? Earthing के प्रकार क्या है ? और Earthing की जरूरत क्यों है? आशा करता हु हमारी ये पोस्ट आपके लिये उपयोगी और फायदेमंद साबित होगी,

अगर इस विषय के बारे में कोई सवाल है या आप किसी अन्य विषय पर कुछ जानना चाहते है तो इसके लिये आप हमे कमेंट कर सकते हो,हम आपके हर सवाल का बहोत ही जल्द जवाब देंगे, इसी के साथ आज्ञा लेना चाहूंगा फिर मिलेंगे किसी अन्य टॉपिक पर तब तक के लिए जय हिंद ,वंदे मातरम।

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