Artical 370 (अनुच्छेद 370) क्या है और इसके खत्म होने से क्या होगा असर?

कहते है jammu & Kasmir इस धरती पर सबसे खूबसूरत जगह है, ऐसी बहुत सी चीजे है जो जम्मू और कश्मीर में देखने को मिलती है जो हमे पसंद आती है। पर एक ऐसी चीज भी जो ऐतिहासिक समय (आज़ादी के समय) से जुडी हुई है और वह है Artical 370.

क्या आप जानते है अनुच्छेद 370 या आर्टिकल 370 क्या है? (What is Artical 370 In Hindi), और Artical 370 क्यों बनाया गया, Artical 370 में क्या नियम है? और Artical 370 अगर जम्मू और कश्मीर से हटा दिया जाये तो इससे जम्मू और कश्मीर को क्या फायदा होगा?,और इससे भारत को क्या फायदा होगा?, अगर नहीं तो इस पोस्ट में हम आपको Artical 370 के विषय में पूरी जानकारी देंगे और समझायेंगे की Artical 370 Kya Hai?

आज दिनांक 5 अगस्त 2019 को करीब 72 साल के बाद ये धारा 370 को अचानक से खत्म कर दिया गया। अब ये Artical 370 खत्म होने के बाद हमें और जम्मू कश्मीर के लोगो को क्या फायदा होगा, इससे क्या परिवर्तन आएगा, इसके विषय में हम विस्तार से पूरी जानकारी देंगे।

आर्टिकल 370 क्या है? ( What is Artical 370 In Hindi)article-370

Artical 370 Kya Hai? – जैसा की हम सभी जानते है की 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजो की गुलामी से पूर्ण रूप से आज़ाद हुआ था। ठीक उसी समय जम्मू और कश्मीर भी आजाद हुआ था। उस समय जम्मू और कश्मीर में महाराजा हरि सिंह का शासन था और वह चाहते थे की जम्मू और कश्मीर एक स्वतंत्र राज्य हो। इसलिए जम्मू और कश्मीर किसी देश का हिस्सा ना होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र हुआ।

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20 अक्टूबर 1947 में आजाद कश्मीर सेना ने पाकिस्तान के साथ मिलकर कश्मीर पर हमला कर कश्मीर के कई हिस्सों पर कब्जा कर दिया। परिस्थिति को देखते हुए महाराजा हरि सिंह ने जम्मू और कश्मीर की रक्षा के लिए भारत से मदद मांगी पर कश्मीर एक स्वतंत्र राष्ट्र होने से भारत उसमे कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता था और ना ही कश्मीर भारत का हिस्सा था जो उसकी रक्षा का दायत्व स्वीकार करता।

26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ अस्थायी विलय की घोषणा करदी जिससे अब जम्मू और कश्मीर भारत का एक हिस्सा बन गया। और तब भारत ने महाराजा हरि सिंह की मदद की।

इस प्रकार के समझौते में जम्मू और कश्मीर ने सिर्फ तीन विषयो को भारत के हवाले लिया था जो थे 1.रक्षा ,2.विदेशी मामले और 3. दूरसंचार। इस विलय में एक समजौता हुआ था की जब तक जम्मू और कश्मीर के लोग स्वयं अपने संविधान का निर्माण नहीं करते तब तक भारत का संविधान जम्मू कश्मीर को सिर्फ अस्थायी व्यवस्था प्रदान करेगा। इस समझौते के साथ Artical 370 को भारत के संविधान में 17 नवंबर 1952 से शामिल किया गया था।

Artical 370 के जम्मू और कश्मीर के प्रति प्रावधान

इस Artical 370 को पारित करते हुए कुछ नियम और समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे आइये जानते है वह समझौते एवं वादे क्या थे।

  1. Artical 370 के मुताबिक जम्मू और कश्मीर भारतीय संघ का संवैधानिक राज्य होगा परंतु उसका नाम, उसके क्षेत्रफल, और उसकी सीमा को बदलने का अधिकार भारत की केंद्रसरकार का नहीं होगा, भारत तभी ऐसा कर सकता है जब जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार ऐसा करने की अनुमति प्रदान करे।

2. Artical 370 में केवल तीन मामले (1.रक्षा ,2.विदेशी मामले और 3. दूरसंचार) पर ही भारत हस्तक्षेप कर सकता है, इसके सिवाय भारत कोई भी कानून नहीं ला सकता और ना ही जम्मू और कश्मीर के कानून में बदलाव कर सकता है अगर ऐसा करना हो तो केंद्रसरकार को राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी, बिना अनुमति भारत इसको करने में असमर्थ होगा।

3. Artical 370 के अनुसार जम्मू और कश्मीर का अपना खुद का संविधान होगा, जम्मू और कश्मीर का प्रशासन अपने खुद के संविधान से ही चलेगा ना की भारत के संविधान के हिसाब से।

Artical 370 के नियम को इस तरह से समझे

  • दूसरे राज्य के नागरिक को जम्मू और कश्मीर की नागरिकता कभी नहीं मिल सकती परंतु जम्मू कश्मीर के नागरिक को दूसरे राज्य की नागरिकता मिल सकती है। इसे यु कहे की भारत के नागरिक को जम्मू और कश्मीर की नागरिकता नहीं मिल सकती परंतु जम्मू और कश्मीर के नागरिक को भारत की नागरिकता मिल सकती है।
  • भारत के दूसरे राज्य से कोई भी नागरिक जम्मू और कश्मीर में कोई भी संपत्ति नहीं खरीद सकता (ना मकान या ना ही जमीन) परंतु जम्मू और कश्मीर का नागरिक भारत के किसी भी राज्य में संपत्ति खरीद सकता है।
  • जम्मू और कश्मीर के नागरिक को दो प्रकार की नागरिकता प्रदान है एक तो उनकी खुद की तथा दूसरी भारत की।
  • यदि कोई कश्मीरी महिला किसी भारतीय से शादी करती है तो महिला की जम्मू और कश्मीर की नागरिकता ख़त्म हो जाएगी पर अगर वही महिला जब कोई पाकिस्तानी से शादी करती है तब उस महिला की कश्मीर की नागरिकता बनी रहेगी। परंतु उसके विपरीत जब कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी महिला से शादी करले तो उसे भारत की नागरिकता मिल जाती है।
  • आम तौर पर जब कोई भारतीय नागरिक किसी कारण से भारत छोड़ विदेश चला जाता है तब उसकी भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती है, परन्तु अगर कोई कश्मीरी नागरिक पाकिस्तान चला जाये और भविष्य में अगर वापस जम्मू और कश्मीर में आये तो उसे उसकी खोयी हुई नागरिकता वापस मिल जाती है।
  • जम्मू और कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों(राष्ट्रगीत, राष्ट्रध्वज आदि) का अपमान करना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता और नाही इसके लिए कोई सजा है।
  • यदि भारत में कोई आर्थिक संकट आता है तो इसका किसी भी प्रकार का असर जम्मू और कश्मीर में नहीं पड़ेगा
  • अगर भारत संविधान में कोई संशोधन होता है तो यह संशोधन जब तक राष्ट्रपति के विशेष आदेश पर लागु करने की अनुमति न हो तब तक जम्मू और कश्मीर पर लागु नहीं होगा।

Artical 370 के ख़त्म होने से होनेवाले बदलाव

जैसा की आप जानते है की दिनांक 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में Artical 370 ख़त्म कर दिया गया है। इसका असर क्या होगा? इससे क्या फायदा होगा? क्या इससे भारत को फायदा होगा? आइये अब विस्तार से जानते है।

  • लद्दाख एवं जम्मू और कश्मीर बना केंद्रशासित प्रदेश ।
  • लद्दाख हुआ जम्मू और कश्मीर से अलग।
  • लद्दाख और जम्मू- कश्मीर पर अब लागू होगा भारत का संविधान।
  • जम्मू और कश्मीर में अब दूसरे राज्य के नागरिक संपत्ति खरीद सकते है।
  • दूसरे राज्य के नागरिक अब जम्मू और कश्मीर की नागरिकता प्राप्त कर सकते है इससे उन्हें वहां जाकर वोट देने का अधिकार मिलेगा।
  • अगर किसी अन्य राज्य का लड़का जम्मू और कश्मीर की लड़की से शादी करता है तो अब उसकी भारतीय नागरिकता रहेगी।
  • देश मे एक राज्य कम हुआ और 2 केंद्रशासित प्रदेश बढ़े।
  • जम्मू और कश्मीर को मिलगा भारतीय सेवा का लाभ।

आज नया क्या सिखा?

मुझे लगता है की आप लोगों को आर्टिकल 370 क्या है? Artical 370 क्यों बनाया गया, Artical 370 में क्या नियम है? इसकी पूरी जानकारी दी है और मैं ये आशा करता हूँ के आप सभी पाठ्को को हमारी आज का लेख पसंद आया होगा

आर्टिकल 370 क्या है? आप किसी को भी असानी से बता सकते है दोस्तो आपसे गुजारिस है की आप इस जानकारी को अपने सभी मित्रो के साथ में Share करें, जिससे हमारे सभी दोस्तो इसके बाारे मे जानकारी मिले।

मेरी हमेशा से बस यही कोशिश रही है की मैं हमेशा अपने सभी दोस्तो को हर तरह की जानकारी दे। अगर

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