सादगी(Simplicity) का मर्म क्या है ?

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सादगी(Simplicity) मानव व्यवहार कि अमूल्य निधि हैं। सादगी से तात्पर्य व्यक्ति की सरलता, विनम्रता या उसके भोलेपन से है। किसी व्यक्ति की सादगी से उसके नैतिक आचरण का पता चलता है। ऐसा माना जाता हैं कि सादगी पसन्द लोग जीवन में ज्यादा सफल होते हैं। क्योंकि वे ईर्ष्या, द्वेष,बदले की भावना जैसे विकारों से दूर होते हैं। ऐसे लोग अपनी ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल करते हैं। सकारात्मक सोचने से मानव मस्तिष्क शुद्ध रहता हैं। और काम करने के लिए आवश्यक ऊर्जा भी लगातार मिलती रहती हैं। मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले सकारात्मक विचार मनुष्य को प्रेरित करते रहते हैं। मनुष्य का सादगीयुक्त व्यवहार मानवता का पर्याय हैं। सादगीयुक्त आचरण में इतनी ताकत है कि इससे सृष्टि भी जीती जा सकती हैं।

हालांकि जितनी सादगी(Simplicity) महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, स्वामी विवेकानंद और मदन मोहन मालवीय जैसे रास्त्रनायको में थी,वैसी अब लोगो मे विरल देखने को मिलती हैं। आज लोग छोटी- छोटी बातों पर झल्ला जाना,क्रोधित हो जा रहे हैं। हिंसा पर उतारू हो जा रहे हैं। यह कितना सही हैं ? अव्यवस्तित जीवन शैली, आभासी दुनिया के प्रति दीवानगी और छूटते मानवीय मूल्यों ने मनुष्य में व्याप्त सादगी को छीन लिया है। सफलता मिलने, उपलब्धिया अर्जित करने अथवा धनवान बनने के बाद व्यक्ति सादगी से मुक्त हो जाता हैं। इस तरह सादगी युक्त व्यवहार में आयी कमी व्यक्ति के अहंकारी होने का बोध कराती हैं। याद रहे, सादगी भरा जीवन संतोषप्रद,सुखद और सार्थक होता हैं।

सादगीपूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक है व्यक्ति अपनी जरूरतों को सीमित करें। अत्यधिक संग्रह की प्रवर्ती इस मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा खुशियों के निर्धारण में भी सावधानी बरतनी होगी।