मक्का-मदीना में बसें वायरल शिवलिंग के तस्वीर का सच

कुछ बातें ऐसी होती है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक शेयर होती, और वही आगे फॉरवर्ड होती है, पर उसके पीछे का सच जानने की कोशिश किसीसे नहीं होती, बस वो बातें मान ली जाती है और अगर कोई सच सामने लाने की कोशिश करें भी तो उसपर पूर्वजों की बातें ना मानने का इल्जाम लगाकर उसे चुप करा दिया जाता है, इसी बात का फायदा कुछ लोग उठाते है वो औरों की अज्ञानता को जानकर उनतक कुछ भी गलत जानकारी पहुंचाते हैं, और आज-कल के सोशल मीडिया के ज़माने में तो एक पल नहीं लगता किसी भी Information  को दुनिया में पहुंचने के लिए.

वायरल पोस्ट 

कुछ दिनों पहले ऐसी ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, दावा यह किया गया था की पोस्ट में जो शिवलिंग की तस्वीर दिखाई गयी हैं, वो मक्का-मदीना में बसे शिवलिंग की हैं,और धर्म की दुहाई देकर उस पोस्ट को maximum share करने के लिए कहा गया था, जब की अबतक इस बात का ही ठोस सबूत मिला नहीं हैं की मक्का-मदीना में शिवलिंग की मूर्ति है या नहीं, बात किसीके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं है पर लोगों की श्रद्धा का गलत फायदा उठाकर उनतक गलत जानकारी पहुंचाने वाले लोगों पर लोगों पर गौर करने की जरूर हैं. हाँ इस बात में सच्चाई जरूर हैं की मक्का-मदीना को लेकर कुछ ऐसी मान्यताएं हैं जो हिंदू धर्म में भी हैं हैं, जैसे हिंदू धर्म में गंगा जल को पवित्र माना जाता हैं और मुस्लिम धर्म में, मक्का-मदीना में एक कुआँ हैं जो कभी नहीं सुखता, उसके जल को पवित्र माना जाता हैं, या फिर माथा टेकने की प्रथा, इसके अलावा मक्का-मदीना में कुछ ऐसे शब्द लिखें हुए हैं, जो संस्कृत में पाए जाते हैं, पर मक्का-मदीना में शिवलिंग का साक्षात्कार अभी तक तो किसीको नहीं हुआ.

वायरल तस्वीर का सच 

हम बात कर रहे थे उस शिवलिंग के तस्वीर की जो इस दावे के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी की, वो तस्वीर मक्का-मदीना में बसे शिवलिंग की हैं, जब मीडिया ने इस बात की पड़ताल की तो ये सच सामने आया की, ये तस्वीर राजस्थान में स्थित विराटनगर भीम की डूंगरी नामक जगह पर विराजमान हैं, विराट नगर, विराट नामक राजा के नाम से जाना जाता है, कहा जाता है की, विराट नगर का संबध महाभारत से है, पांडवो ने अपना अज्ञातवास का समय यही पूरा किया था, पिछले 11 सालों से तस्वीर में दिखाई गयी शिवलिंग की मूर्ति विराटनगर में बसी हुई है, और बड़ी आसानी से किसीने इसे मक्का-मदीना से जोड़ दिया. आखिर क्यों मना है गैर मुस्लिमों को मक्का-मदीना में जाना  बात कुछ ऐसी है की जैसे ही जेद्दाह शहर ( जेद्दाह शहर एक प्रमुख बंदरगाह है और हवाई मार्ग का ये मुख्य केंद्र है ) से मक्का जाने वाले मार्ग पर जगह जगह पर निर्देश लिखें हुए है की यहाँ गैर मुस्लिम लोगों का जाना मना है, इससे पहले गैर मुस्लिम की जगह काफिर इस  शब्द का उपयोग किया जाता था, काफिर का मतलब होता है “नास्तिक”, पर अब गैर मुस्लिम word का उपयोग किया जाता है. Normally वहा पर सबकुछ अरेबी में ही लिखा जाता है. कहा जाता है की, मक्का-मदीना में  गैर मुस्लिम धर्म के लोगों का जाना इसलिए मना है, क्योंकि उनकी ये बुनियादी शर्त है की, मक्का-मदीना में जाने वाले इंसान का अल्लाह पर, मुस्लिम धर्म पर पूरा विश्वास होना चाहिए, जो शायद और धर्म के लोग उस विश्वास पर खरे ना उतरे, maybe हो सकता है.

सच 

भाई मेरे लिए तो ये सारी बातें, मेरी समझ से परे है क्योंकि मेरी समझ के मुताबिक मस्जिद, मंदिर, गुरुद्वार इन सबका मतलब एक है क्योंकि इन सब में बसता रब है, बस हम उसे पुकारते अलग नाम से है. अगर आप इसी तरह और किसी topic पर जानकारी पाना चाहते है, तो comment में topic का नाम जरूर mention करें .

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