तिब्बत को आजाद होने की एक उम्मीद।

tibet freedom

आजाद तिब्बत की आवाज बुलंद करने वाले दलाई लामा की एक छोटी सी कहानी तिब्बत में चीनी वर्चस्व का विरोध करने के कारण तीन दशक चीनी सैनिकों में कैद रहने और यात्रा भोगने के बाद वहां से भाग कर भारत अगर पूरी दुनिया को अपनी कहानी बताएं जो 3 नवंबर 1992 को हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला में देवास हो गया गात्सु की कोमल आवाज तिब्बत में चीनी आक्रमण की कठोर आज लोगों में से एक थी तिब्बत पर चीनी हमले और दलाई लामा भाग के भाग कर भारत आने से जो तिब्बत में उथल-पुथल हुई उसी कारण दांतो को गिरफ्तार कर लिया गया था 1992 तक चीनी कैद में रहा इस दौरान उसे भूखा रखा गया खाने को कुछ नहीं केवल एक कप सौंप दिया गया उससे भारी जंजीरों में जकड़ कर रखा गया

उसने बताया था कि सैनिक उसे लोहे की छड़ी से पीटते थे विरोध करने पर एक बार सैनिक के साथी ने लोहे की छड़ उसके दातों में घुसा दी थी उन्हें तिब्बती झंडे और दलाई लामा की लिखी हुई चीजों के साथ पकड़े जाने पर फिर जेल में ठोक दिया गया आखिरकार चीन ने 1992 में गात्सु को आजाद कर दिया इसके पीछे एमनेस्टी का दबाव था

होने के बाद होने के बाद उसने कुछ पैसे कमाए और कुछ अपने मित्रों से संपर्क किया उन्होंने जेल अधिकारियों को रिश्वत देकर वचन ले ली जिस क्षण से उसकी पिटाई हुआ करती थी अगले साल तिब्बत से भाकर भारत आए

धातु की धातु की छड़ उन्होंने अपने कपड़े मैं सिपाई ताकि वाह री दुनिया को शोषण सबूत दिखा सके पूरी दुनिया भर में घूम घूम कर उन्होंने अपनी कहानी बताइए 1995 में उन्होंने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग वाशिंगटन स्थित एक मानव अधिकार समिति के सामने अपनी बात रखी और उन्होंने एक किताब लिखी दलाई लामा ने इसकी भूमिका लिखते हुए कहा हमारे विराट लक्ष्य की प्राप्ति घात शो के समर्पण और असंग तिब्बतियों के साथ हुए अत्याचारों का विवरण सबके सामने लाना है

वर्ष 1933 मैं दक्षिणी तिब्बत के प्रणाम गांव में धात रोग का जन्म हुआ था उसके बचपन का नाम नाडोल था उसका परिवार भेड़ बकरियां पाल तथा उसके पिता गांव के मुखिया थे वह एक धर्मशाला में रहते थे जो दलाई लामा का भी घर है धर्मशाला एक अस्पताल में उनका तह बास हो गया था बस 1997 की एक पत्रिका को इंटरव्यू देते हुए गालों ने कहा था मैंने जो कुछ किया उसके लिए मुझे कोई पछतावा नहीं मैंने तिब्बत की आजादी के पोस्टर अपने अत्याचारों के बारे में बताने के लिए नहीं बल्कि पूरी तिब्बतियों को बेहतरी से रखने के लिए रखे थे पूरा देश जेल में था वैसे मेरे साथ हुआ जो उतना महत्वपूर्ण नहीं था