हमारे समाज में महिलाओं की स्थिति आज भी है खराब।

बड़े बड़े दावे किए जाते हैं कि लड़कियां किसी से कम नहीं है। किसी के मामले में कम नहीं है जबकि हकीकत इसके उलट है कुछ इलाकों में लड़कियों को एक से निश्चित सीमा में रहना होता है तथा उनके अनुरूप कार्य करना पड़ता है। आज भी कहीं-कहीं पर पर्दा प्रथा जारी है और उसके अंदर दम करती महिलाओं की जिंदगी दफन हो जाती है।

 

सरकार की योजनाओं का नही हो या रहा फायदा।

सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं लेकिन यह पूरी तरह से कारगर नहीं है। आज भी माता पिता ब्लू हमेशा लड़के को ही देते हैं लड़की को सेक्स भी माना जाता है लड़को को अपने घर का चिराग मानते हैं। लड़कियों को बहुत मानते हैं आज भी लड़कों को सम्मान से देखा जाता हैदेश के राजनेताओं में सत्ता पाने की भूख। लड़कियों को पति से देखा जा रहा है आजकल समाज में बड़ी बातें तो चल रही है लेकिन इसका कुछ असर दिखाई नहीं दे रहा है।

गांव में तो स्थिति बद से बदतर है यहां और देना तो घर से बाहर निकल सकती हैं ना ही किसी मर्द से बात कर सकते हैं। सिर्फ इनकी स्थिति एक पशु की तरह रह जाती है कि जहां पर बांधी पर बंद रहता है। जो खिला वो खा लेता है चुपचाप ना कुछ बोलता है ना कुछ कहता है स्त्री की स्थिति आज भी बहुत खराब है

 

हमारे देश की महिलाएं आज भी हे दबाव में।

महिलाओं के शोषण के लिए अनेक कार्य प्रगतिशील हैं। लेकिन उनका आंशिक असर ही दिख रहा है। महिलाओं को आज भी मैं सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिसकी वह हकदार है। कहीं कहीं पर तो हालत इस तरह से खराब है स्त्रियों की कि उन्हें केवल बच्चा पैदा करने की मशीन और अपनी मनोरंजन की मूर्तियां माना जाता है। आज भी उतना ही अपने मन की बात कह पाती है और ना ही अपने मन का कुछ कर बात नहीं है। सिर्फ अंदर की घुटन से ही ही अपना जीवन गुजार देते हैं।

आज जो महिलाओं के साथ हो रहा है शायद वह कभी कम होगा भारत एक प्रगतिशील राष्ट्रीय शायद इसका कुछ हो इसकी उम्मीद हर किसी को है। आज भी महिलाओं की हालत बहुत खराब है और दयनीय है। कुछ इलाकों में औरतों को सिर्फ इसलिए रखा जाता है कि उसे बच्चा पैदा करो और उनका यौन शोषण करो और रही जिंदगी मारपीट साहू और काम करो।