हमारे यहाँ सरकारी स्कूलों की स्थिति।

goverment school

आजकल सरकारी स्कूलों की स्थिति जो है वह शायद कभी नहीं थी इतनी दयनीय की कुछ कहा ही नहीं जा सकता जहां संसाधनों के लिए सरकार ना तो ढंग से ही अनुदान देती है और ना ही उनके लिए उचित व्यवस्था करते हैं साथ ही ना तो प्रशासन ही उनकी और ध्यान देता है जो अत्यंत निंदनीय है ।

आज सरकारी स्कूलों में उन्हीं के बच्चे जाते हैं जो घर से बहुत कम है वाले होते हैं अत्यंत गरीब होते हैं इस आस में अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजते हैं कि उनके बच्चों को उचित शिक्षा मिल सके लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता यहां के जो टीचर होते हैं वह सही से नहीं पढ़ाते और अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूल में पढ़ाना पसंद नहीं करते वह अपना केबल समय काटने के लिए आता है कि साहब में कहीं ड्यूटी पर गैरहाजिर पाए तो सस्पेंड ना कर दें इस डर से वह स्कूल तो आते हैं लेकिन शायद अपने काम पर कभी ध्यान नहीं देते वह यह भूल जाते हैं कि उनका क्या कार्य है और उन्हें क्या करना है उन्हें सिर्फ अपनी ड्यूटी यानी की सैलरी से मतलब हो जाता है और वह कुछ नहीं करते साथी ना तो पर्याप्त व्यवस्था की मांग करते हैं नहीं बच्चों को सही से बेसिक ज्ञान देते हैं जो अशिक्षा को प्रमाणित करता है यह बच्चे ना तो घर के रहते हैं ना घाट के नहीं पढ़ पाते हैं और ना ही अनपढ़ कहलाते हैं बेचारे वो मां बाप जो यह सोचते हैं कि हमारा बच्चा अगर सरकारी में जाएगा तो शायद कुछ पढ़ लिख जाए लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है बच्चों से सर जी कहते हैं जब हमारे लिए कुछ खाने के लिए गांव से लेकर आओ बेचारे बच्चे करें ना तो क्या करें मास्टरजी होने की थी ना इसलिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं जो यह दर्शाता है कि हमारा प्रशासन सरकारी स्कूलों के लिए कितना गैर जिम्मेदाराना है और हमारे कुछ प्रतिनिधि होते हैं जो कभी ध्यान नहीं देते हैं कि सरकारी स्कूलों की क्या स्थिति है उन्हें कोई मतलब नहीं होता अपना प्राइवेट स्कूल खोल लेते हैं और प्रशासन को ढीला रखते हैं ताकि सरकारी स्कूलों में ढंग की पढ़ाई ना हो और उनके स्कूल की पब्लिक सिटी बनी रहे यही स्थिति है हमारे सरकारी स्कूलों की जिसे यह तो कहा जा सकता है कि सच्चा हमारा जन्मसिद्ध अधिकार तो है लेकिन यह अधिकार कैसे दिया जाता है इसका कोई अभी तक नियम नहीं मनाया गया और ना ही इसे पालन करने के लिए कोई प्रतिबंध कानून बनाया गया अगर ऐसा है तो इससे बेहतर है किन सरकारी स्कूलों को समाप्त ही कर दिया