योगीराज में गन्ना किसानों की आय बुरे दिन

यूपी के गन्ना किसानों की मुसीबत में थमने का नाम नहीं ले रही है ना तो फैक्ट्री आम का गन्ना खरीद रहे हैं। अगर खरीद रही है तो उनका पेमेंट नहीं कर रही है। ऐसे में किसान करें तो क्या करें उन्होंने कर ले कर अपनी फसल में लगा फसल का कोई उचित दाम नहीं मिल रहा और जो मिलना है वह सिर्फ ना के बराबर है।

 

किसानों की हालत बहुत ही दयनीय है।

सरकार ने चुनाव से पहले वादा किया था कि 14 दिनों में किसानों का पेमेंट कर दिया जाएगा लेकिन ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा आज किसान अत्यंत परेशान है जो कुछ नहीं कर पा रहे ना तो गन्ना की कटाई कर पा रहे हैं ना तो आने वाली फसल हो रहा है ऐसे में किसानों की हालत बहुत खराब है

 

चीनी उत्पादन में यूपी का स्थान।

हमारे देश में यूपी चीनी उत्पादन में प्रथम स्थान हासिल है लेकिन यहां के किसानों को अब तक कोई उचित समाधान नहीं मिला है जिस कारण वह अपनी फसल को बोने पौने दामों में बेच देते हैं। मिलना तो उन्हें खरीद के लिए पर्चियां नहीं है अगर कभी कभी देती हैं। तो उनका बकाया 66 महीने बाद देती है इसलिए किसान बहुत परेशान है और सरकार उम्मीद करते हैं लेकिन सरकार उनकी उम्मीदों पर कोई फैसला नहीं करती। अतः किसान कभी कभी कर्ज़ से परेशान होकर अपनी आत्महत्या तक कर लेते हैं।

 

पिछले बस धरना को लेकर केंद्रीय मंत्री का एक निंदनीय बयान आया था की चीनी की जरूरत नहीं तो गन्ना बोते ही क्यों हो अगर ऐसा नहीं है। तो आपको पाकिस्तान से चीनी लाते हुए एक पैसे की शर्म नहीं आई आप अपने किसानों के पेट पर लात मारकर दूसरे राष्ट्र के किसानों की आय बढ़ाने में सहयोग कर रही है। गन्ना किसान कभी-कभी आंदोलन भी करता है तो भी उनके आंदोलन का कोई उचित समाधान नहीं किया जाता। जो कि एक निंदनीय है। जो किसान अपनी सारी जमापूंजी आस और सब कुछ एक खुले आसमान के नीचे रखकर शायद इस आस में रख करता है की आने वाली फसल उसकी खुशियों में चार चांद लगा दे दे लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता ना तो उनकी फसल को उचित मिलता है।

ऐसे में किसान अपनी फसल को या तो आग लगा देते हैं। या तो उन्हें खेतों में ही जोत देते हैं अगर कर्ज उनकी औकात से ज्यादा हो जाता है तो बेचारा किसान अपनी आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाता है।