तीन तलाक को खत्म करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर .

tripel talaq bill

तीन तलाक जैसी कुप्रथा का समर्थन कोई भी सभ्य समाज नहीं कर सकता लेकिन मुश्किल यह है सत्ता पक्ष और विपक्ष की दरगाह के बीच तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने का रास्ता लगातार बाधित हो रहा है।

तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2018 को सरकार ने  ना केवल करीब 1 साल बाद लोकसभा में फिर पारित करवा लिया बल्कि विपक्ष की मांगों को मानते हुए कुछ संशोधन इस की कठोरता में थोड़ी कमी करेंगे उदाहरण के लिए पीड़िता और उसके खून के रिश्तेदार ही प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार होगा

जबकि पहले मसौदे पर तीन तलाक के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करा सकता था इसी तरह बिगड़ता का पक्ष सुनने के बाद मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार और समझौता कराने का अधिकार दिया गया है जबकि ना केवल police के पास बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार था बल्कि समझौते का कोई प्रावधान नहीं था तीन तलाक जैसी कुप्रथा का कोई भी सभ्य समाज समर्थन नहीं कर सकता सिर्फ यही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक बता दिया है बल्कि दुनिया के 22 देश में यह गैरकानूनी है अलबत्ता मुश्किल है अपनी इस पहल को स्वाभाविक ही सरकार मुस्लिम महिलाओं और इंसानियत और इंसाफ का मामला बता रही है

उसे विपक्ष की सहमति के बगैर वह कानून का रूप नहीं दे सकती 1 साल बाद कुछ संशोधनों के साथ लोकसभा में पेश और पारित किए जाने के बावजूद राज्यसभा में इसके पारित होने की संभावना क्षीण ही है क्योंकि ना तो उच्च सदन में सरकार का बहुमत है और ना ही विपक्ष के आरोपों की धार मंद पड़ी है विपक्ष इस विधेयक पर कुछ प्रावधानों को संविधान के खिलाफ बता रहा है साथ ही दीवानी मामले को अपराधिक बना देने क्योंकि इसमें पति को 3 साल जेल का प्रावधान है पिता के लिए मुआवजा देना करने लग एक समानता की अनदेखी करने एक समुदाय विशेष लक्षित करने के लिए भी इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे संयुक्त प्रवर समिति को सौंपने की मांग कर रहा है सरकार के लिए मुश्किल स्थिति इसलिए है की तीन तलाक पर अनुमोदक और बीजद जैसे पैदल भी विपक्ष के खेमे में है जो उसके साथ होते थे

इसलिए तीन तलाक के खिलाफ लाए गए संशोधित विधेयक पर विपक्ष के तेवर बहुत हल्के में नहीं लिया जा सकता उल्टे यह सवाल उठेगा कि राज्यसभा के समीकरणों को देखते हुए सरकार एक अध्यादेश को क्यों लाई थी अब फिर इसे लोकसभा से पारित कराने के पीछे गणित क्या है

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