2019 में मोदी सरकार द्वारा जीत के लिए पहला कदम : ऑपरेशन यूनिकॉर्न

सन् 2013-14 में भारत ने इटली की एक कंपनी अगस्तावेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की डील की थी। जिनकी कीमत करीब 3600 करोड़ रुपए थी। जिनमें से 360 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच सीबीआई द्वारा की गई थी।

जांच द्वारा यह पता चला कि इस घोटाले में यूपीए सरकार के वायुसेना के प्रमुख एस.पी त्यागी और उनके 13 साथी इस घोटाले में शामिल थे। और तो और अगस्तावेस्टलैंड की मातृ कंपनी फिनमेकैनिका के ऊपर भी इटली हाई कोर्ट द्वारा घोटाले के आरोप लगे है। जिनसे स्पष्ट है कि इस घोटाले में एक बड़ा हाथ मारा गया था। इन 13 लोगों में एक ब्रिटिश बिचोलिया भी था जिसका नाम क्रिश्चियन मिशेल था। मिशेल को यूएई की पुलिस ने 2017 में पकड़ लिया था परंतु यूएई की सरकार उसे भारत को नहीं सौंप रही थी क्योंकि उसकी नागरिकता इंग्लैंड की थी।

इसी को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा एक ऑपरेशन को जन्म दिया गया और उसे यूनिकॉर्न नाम दिया गया। सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर साई मनोहर के नेतृत्व में एक दल पिछले सप्ताह मिशेल को लाने यूएई गया था और मंगलवार रात 10:35 पर भारत लाया गया। अजित जी के दिशा-निर्देश अनुसार मिशेल को दिल्ली लाने में सीबीआई को सफलता प्राप्त हुई।

एक और बड़ा कारण यह भी था जिस वजह से इस ऑपरेशन को सफलता प्राप्त हो सकी। वह कारण था भारत और यूएई के बहुत पुराने रिश्ते। भारत एक अच्छा खासा तेल आयातक देश है जिसमें से ज्यादातर आयात वह यूएई से ही करता है और जिस वजह से भारत और यूएई के रिश्ते मज़बूत है। इसी वजह से भारत को मिशेल को लाने में कोई दिक्कत नहीं हुई और यूएई सरकार का इसमें पूरा सहयोग प्राप्त हो पाया।

:- अभिनव जैन
:- दिल्ली विश्वविद्यालय