क्या नेताजी नेहरू ने बंद करवाएं सुभाष चंद्र की तस्वीर वाले नोट।

बहुत कम ही लोग ऐसे होंगे जो यह जानते होंगे कि सुभाष चंद्र बोस जी की नोट में भी कर पहले कभी तस्वीर थी Subhashchandra Bose को बहुत से लोग जानते होंगे और यह भी पता होगा कि उन्होंने अपने कई बड़े-बड़े योगदान दिए हैं। आजादी में पर क्या कोई यह जानता है कि पहले उनकी तस्वीर के छापे वाले नोट का करते थे। जैसे आज के जमाने में गांधीजी के हैं पर कोई लोग कहते हैं कि उनकी तस्वीर वाले नोट जवाहरलाल नेहरू ने बंद करवाएं। अगर हां तो ऐसा क्यों हुआ क्या सच में जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा क्या किया था इसका कारण क्या है।

1941 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी अग्रेजो की गिरफ्त से भाग कर विदेश चले गए। 1942 में मोहन सिंग ने आजाद हिंद फौज बनायी। उन्होंने सिंगापुर में किसकी सरकार बनायी। जिसका नाम आजाद हिंद रखा गया उनका मतलब था हिंद को आजाद करना। सरकार को कई देशों ने मान्यता विदेशी सरकार का मतलब था हिंदू को आजाद करना। तब सुभाष चंद्र बोस ने जापान से मिलेंगे उनका यह मानना था कि वह हिंसा से आजादी मिलेगी अहिंसा से आजादी नहीं मिल सकती थी।

इस संगठन को बहुत सपोर्ट मिला और इस संगठन को संभाले रखने के लिए इस बैंक का भी 1944 में गठन किया गया। एक बैंक में ना करें जिस बैंक का नाम आजाद हिंद बैंक जैसे इस संगठन को चलाने के लिए पैसे की आवश्यकता थी। वैसे ही उस पैसे को रखने के लिए भी एक बैंक की आवश्यकता थी इसलिए या बैंक बनाएगा जिसका नाम आजाद मैं आजाद हिंद बैंक रखा गया। इस बैंक ऑफ बर्मा में खोला गया जिन सरकार नेम आजाद हिंद संगठन को सपोर्ट किया उस सरकार ने आजाद हिंद बैंक करेंसी को भी मान्यता दे दी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जो करे से छपी थी वह भारत आजाद होने के बाद कि नहीं है। जब अंग्रेजों से भारत आजाद हुआ वह करम से जब भी नहीं थी इसलिए इसको भारत में लागू नहीं किया जा सकता था। इसलिए इस बात का कहना है कि नेहरू जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की करंसी बंद करवाई है या उनके फोटो वाली करंसी बंद करवाई है यह कहना सही नहीं है।

नेता जी ने हमारे साथ में काफी सहयोग किया वह भले ही भारत की हीरो हो परंतु इस नोट को भारत में लागू नहीं किया जा सकता था।