padma shri जितने वाली Kalpana saroj कैसे बनी Kamani Tube कंपनी की मालिक

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किसीने कहा है कि, जंजीरे पैरों में नहीं, सोच में होती हैं, सच ही तो कहा है, अगर कोई चाहे तो वो क्या नहीं कर सकता। बस अपने हौसलों को पर लगाने होते हैं और ये आसमान तो खुला सब के लिए होता है वो जिंदगी से कभी नहीं हारते, जो कभी कोशिशों का दामन नहीं छोड़ते। उतार-चढ़ाव तो सबके जिंदगी में आते हैं। पर कुछ लोग हालातों से समझोता कर लेते हैं। तो कुछ लोग अपने कोशिशों से उन हालातों को बदल देते हैं। फिर ये सारी बातें मायने नहीं रखती कि, वो लड़का है या लड़की है। आमिर है या गरीब है। पढाई मे topper है या फिर average है। उसके पास कोई डिग्री है या नहीं। जिन्हें कुछ करना होता है। वो किसी भी हालात में कर ही लेते हैं। ऐसी ही एक Real Story है, कल्पना सरोज की, जो किसी भी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं, पर सच है।

अखिर कौन है ये Kalpana Saroj

Maharashtra के अकोला जिले के एक छोटे से गाँव रोपर खेड़ा में कल्पना का जन्म हुआ, वो एक गरीब दलित फॅमिली से belong करती थी कल्पना के पिता एक पुलिस हवलदार थे, जिनका वेतन मात्र 300 रु. महीना थी उसीमे घर का पूरा खर्चा चलता था कल्पना के दो भाई और तीन बहने थी, दादा-दादी उनके साथ ही रहते थे पिता पुलिस हवलदार होने के कारण उनका पूरा परिवार पुलिस क्वार्टर में ही रहता था।

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बालविवाह :-

पढाई में होशियार होने के बावजूद, बस समाज के पुराने  सोच के कारण, कल्पना की पढाई 7 वी कक्षा के बाद ही रोक दी गयी, और 12 साल की उम्र ही मे उनकी शादी कर दी गयी, शादी के बाद वो अपने ससुराल के साथ मुंबई में रहने लगी, 12 साल की वो बच्ची ससुराल के अत्याचार का शिकार हो गयी, उनकी छोटी-छोटी गलतियों को बढ़ा-चढ़ाकर उनके ससुराल वाले, उन्हें बेरहमी से पिटते, किसी तरह भी वो उनके जुल्मों को सहते हुए वह रहने लगी, पर जब 6 महीने बाद उनके पिता, उनके ससुराल गये तो उनकी ये दशा देखकर, उन्हें अपने साथ अपने गाँव लेकर गये।

Kalpana Saroj ने मायके में आत्महत्या का  किया प्रयास:-

हम जानते ही हैं, हमारे समाज की सोच को अच्छी तरह से, एक शादी शुदा लड़की जब ससुराल छोड़कर मायके रहने लगती है, तो किस तरह की बातें की जाती है, कुछ लोगों की तो ये फितरत ही होती हैं कि अपनी जिंदगी को छोड़कर दूसरों की जिंदगी में झांकना, आस-पड़ोसियों के लोग ताने कसने लगे, कई तरह की बातें बनाने लगे। कोई भी इंसान ऐसे हालातों में कैसे सुकून से जी सकता है, पिता ने आगे की पढाई शुरू करने की सलाह दी, पर इतने दुखों से घिरी एक बच्ची का पढाई में कैसे मन लगता, आखिर जिंदगी से हारकर उन्होंने मौत को ही गले लगाने का decision ले लिया। कहीं से खटमल मारने की दवाई खरीदकर, अपने बुआ के घर चली गयी, बुआ को काम में व्यस्त देखकर चुपके से उन्होंने सारा जहर खा लिया।

जब बुआ अपना काम खत्म करके आयी तो देखा की, kalpana बेहोश पड़ी है, और उसके हाथो में जहर के शीशियां देखकर, डॉक्टर को बुलाया गया, बचना मुश्किल था, पर कहते है ना, हर किसीको अपने हिस्से का सुख और दुःख झेलना ही होता है, मौत भी इतने आसानी से नहीं मिलती। कल्पना बच गयी, ये एक सेकंड लाइफ उनको मिली थी। जब हमे कुछ करने का second chance मिलता है ना, तो उसे हमे कभी miss नहीं करना चाहिए। जिंदगी बदल जाती है अगर हम उस वक्त का सही से उपयोग करते है तो। कल्पना जी ने भी वही किया। उस दोबार मिली जिंदगी को एक बेहतर तरिके से जीने का decision लिया और जिंदगी में कुछ करने का ठान लिया। कई जगह उन्होंने नौकरी ढूँढ़नी शुरू की। पर कम उम्र और शिक्षा का अभाव उनके जॉब के आड़े आते रहे। फिर उन्होंने मुंबई आने का decision लिया।

kalpana Saroj की नये सफर की शुरुआत :-

16 साल की उम्र में कल्पना काम की तलाश में मुंबई आकर अपने चाचा के साथ रहने लगी, उनके चाचा ने उन्हें एक मिल में शिलाई मशीन के काम पर लगवाया।  पहले तो वो वहा सिर्फ धागा कटिंग का काम करती थी। जिसके लिए उन्हें रोज़ दो रूपये मिलते थे। बाद में शिलाई करने लगी और फिर महीने के सव्वा दो सौ रूपये उन्हें मिलने लगे।

इसी बिच उनके पापा की नौकरी छूट गयी और पूरा परिवार मुंबई में आकर उनके साथ ही रहने लगा, घर का सारा खर्चा उन्हें ही उठाना पड़ता, जैसे तैसे उनकी जिंदगी चल ही रही थी कि, अचानक से उनके जिंदगी में एक तूफान आया। उनकी बहन बीमार रहने लगी, इलाज के लिए पैसे ना होने के कारण, उनके बहन की मृत्यु हो गयी इस घटना का कल्पना जी पर गहरा असर हुआ, उन्होंने पैसों की ऐहमियत को करीब से महसूस किया और गरीबी को दूर करने का फैसला कर लिया।

सफलता की ओर पहला कदम kalpana Saroj का:-

कल्पना ने अपने हालतों को बदलने का फैसला किया और कुछ सिलाई मशीनें घर में ही लगा दी, कड़ी मेहनत करने के बाद उससे कुछ पैसे तो मिल जाते, पर उनका सपना कुछ बड़ा करने का था, वो Business करना चाहती थी, जिसके लिए पैसों की जरूरत थी, उन्होंने बिसनेस लोन लेने के लिए कई प्रयास किये, पर हर जगह उन्हें ऐसे लोग मिलें, जो घुस रिशवत लेने के आदि थे, लेकिन कल्पना जी इसके खिलाफ थी, उन्होंने सरकारी योजनाओं  के बारे में जानकारी हासिल की, और एक संघटन बनाया जो जरूरत मंद लोगों को अलग अलग योजनाओं के बारे में जानकारी पहुचाये। उन्होंने ने भी Maharashtra Government  के अंतर्गत  चलायी जा रही महात्मा ज्योतिबा फुले योजना का लाभ उठाते हुए, 50,000 रूपये का कर्ज लिया।

उन्ही पैसों से महज 22 साल की उम्र में उन्होंने Furniture का बिसनेस शुरू किया, जिससे उन्हें अच्छी इनकम हुई। फिर उन्होंने एक ब्यूटी पार्लर खोला, जब उनकी लाइफ में सब ठीक तरह से चलने लगा, तो उन्होंने एक Steel Furniture व्यापारी से शादी कर ली, पर यहां भी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 1989 में ही उनके पति का देहांत हो गया। उन्हें एक बेटा और एक बेटी है।

Kalpana Saroj  का एक decision, जिसने बदल दी उनकी जिंदगी :-

एक इंसान जो अपनी कुछ मजबूरियों के कारण अपना प्लॉट 2.5 लाख में बेचना चाहता था। उसने कल्पना जी के बारे सुना हुआ था। तो उन्ही के पास वो बेचने के लिए आता है पर जब kalpana Saroj के पास इतने पैसे होते नहीं तो कहता है की अभी सिर्फ १ लाख दे दो, बाकि का बाद में दे देना, kalpana Saroj जी मान जाती है। कहीं से पैसों का इंतजाम करके उन्हें एक लाख रूपये दे देती है, उन्हें बाद में यह पता चलता है की, जो जमीन उन्होंने खरीद ली है, वो illegal है। जिसके ऊपर कुछ भी कंस्ट्रक्शन नहीं किया जा सकता। एक से दो साल उस जमीन के लिए कोर्ट में लढने के बाद, फैसला उनके हक़ में आता है और 2.5 लाख के जमीन की कीमत 50 लाख बन जाती है।

कप्लना जी के इसी तरक्की को देखकर कुछ गुंडे उनकी जान लेने की कोशिश करते हैं, पर पुलिस के मदद से वो उन गुंडों को सबक सिखाती है, और उसके बाद वो अपने साथ एक लाइसेंस रिवॉल्वर भी रख लेती है।

फिर बात जब जमीं पर कंस्ट्रक्शन करने की आती है तो, उनके पास उतने पैसे नहीं होते। फिर इसका solution निकालते हुए वो सिंधु बिसनेसमैन से 65:35 की पार्टनरशिप कर लेती है। जिसमे 65% उनका क्योंकि जमीन उनकी है और 35% सिंधु बिसनेसमैन का जो construction करेगा। वहा  से वो लगभग  4.5 करोड़ रूपये कमा लेती है।

Kalpana Saroj कैसे बनी Kamani Tube कंपनी की मालकीन :-

कमानी ट्यूब्स (Kamani Tubes) की स्थापना 1960 में Shri N.R Kamani द्वारा की गयी थी। शुरू में तो कंपनी ठीक चली पर 1985 में labour unions और management में हुए कुछ विवादों के कारण कंपनी बंद पड गयी।

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1988 में supreme court के दिए गए order के अनुसार कंपनी को दुबारा शुरू किया गया पर एक ऐतिहासिक फैसले में उस कंपनी का मालिकाना हक़, कंपनी में काम करनेवाले, लगभग 3500 workers को दिया गया, workers को कंपनी चलाने नहीं आयी और कंपनी पर करोड़ो रूपये का कर्ज हुआ। हालात इतने ख़राब हुए की, कई workers रास्तें पर भिक माँगतें हुये नजर आये, कई लोगों ने तो अपनी जान भी गवाँ दी, इन सब हालातों का सामना कर रहें, मुसीबत में घिरें workers को लगा की, Kalpana Saroj उनकी मदद कर सकती है। और इसी एक मदद मिलने कि उम्मीद लेकर workers साल 2000 को Kalpana Saroj के पास गये।

पहले तो कंपनी के हालातों को देखकर, कल्पना जी ने खुद को इस मामले से दूर ही रखना ठीक समझा। दरसल कंपनी पर 116 करोड़ का कर्जा था और 140 litigation के मामले थे। लेकिन जब उन्हें workers के हालातों के बारे में पता चला, तो वो खुद को उन्हें मदद करने से रोक नहीं पायी। After all, वो खुद अपने जिंदगी में कई बुरे हालातों से गुज़र चुकी थी।

कंपनी को शिखर तक पहुंचाने में Kalpan Saroj को श्रेय :-

कंपनी के बोर्ड में शामिल होते ही, उन्होंने एक core टीम बनायीं, जिसमे अलग अलग field के experts को शामिल किया, उन्होंने एक रिपोर्ट बनाया की, किन लोगों का कर्जा हैं, उस रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी पर government, bank और कई उद्योगपतियों का कर्जा था। एक चीज उन्होंने नोटिस की, कि आधे से ज्यादा पैसा तो penalty और interest का था।

इन्ही सारी problems को solve करने के लिये वो तत्कालीन वित्त मंत्री से मिली और penalty और interest माफ़ करने की बात उनके सामने रखी। वित्त मंत्री ने कल्पना जी के बातों का मान रखते हुए, बैंकों को उनके साथ मीटिंग करने के लिए सूचित किया। कल्पना जी की लगन और मेहनत देखकर बैंकों ने, ना सिर्फ penalty और interest माफ़ किया, बल्कि इसके अलावा जो मूल कर्ज ता था, उसका 25% माफ़ कर दिया।

सन 2000 से 2006 तक कंपनी के लिए संघर्ष करने के बाद, finally कोर्ट ने उन्हें कमानी ट्यूब्स कंपनी का मालिक बना दिया। और साथ ही ये ऑडर भी दिया की, उन्हें 7 साल में कोर्ट का loan चुकाना होगा और 3 साल में workers का जो भी पैसा बाकि है वो लौटना होगा। पर उन्होंने अपनी खूबी से कोर्ट का सारा लोन एक साल में ही चूका दिया और workers को भी एक ही महीने में सारा पैसा दे दिया।

इसी तरह अपनी ज़िद और मेहनत से एक बंद पड़ी हुई कंपनी को profitable बना दिया। आज के दिन में कमानी ट्यूब्स कंपनी 500 करोड़ की कंपनी बन चुकी है।

उपलब्धियाँ :-

उनके कुछ कर दिखाने के जज्बे को, अपनी हिम्मत और हौसलों से जो उन्होंने कर दिखया। उन सारी उपलब्धियों के लिए एक lady entrepreneur को 2013 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया। कोई बड़ी डिग्री ना होते हुए भी, सरकार ने उन्हें महिला बैंक के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में शामिल कर लिया।

निष्कर्ष :-

वैसे देखा जाये तो kalpana Saroj जी कि ये inspirational stories हैं, जिनसे हम प्रेरणा ले सकते है। kalpana Saroj की स्टोरी को आप तक पहुंचाने का यह उद्देश्य है कि, अगर आप इस स्टोरी को ध्यान से पढोगे और उनके जिंदगी को समझने की कोशिश करोगे, तो देख पाओगे। किस तरह से उन्होंने हर प्रॉब्लम का solution निकला है। बिलकुल फिल्मो वाली स्टोरी है, फर्क बस इतना है की, वो imaginary कहानी होती है और ये सच है।

education का मतलब सिर्फ किताबों तक सिमित नहीं होता। उस education का क्या फायदा जिसका हम अपनी जिंदगी में उपयोग ना कर सकें। किताबें हमे एक सही डायरेक्शन देती है, बाकि सोचना और करना हमारा काम होता है।

हर  बेड़ियाँ  टूट जाती हैं

जब जान इरादों में होती है।

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