इस आदमी ने बचाया था दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध से

Stanislav Yevgrafovich Petrov
Stanislav Yevgrafovich Petrov

तारीख 2 सितंबर 1945 इस दुनिया का सबसे विनाशक युद्ध खत्म हुआ लेकिन साथ ही एक नए युद्ध का आरंभ हुआ जिसे इतिहास में शीत युद्ध नाम से जाना गया जैसे ही दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हुआ दुनिया मे अमेरिका और सोवियत यूनियन दो सबसे ताकतवर देश बनकर उभरे दोनो के बीच दुनिया पर वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गयी अमेरिका पूंजीवाद में ओर सोविएत यूनियन साम्यवाद में मानता था दोनो देश पुर जोर से दुनिया पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे थे इसी कारण कुछ देशों ने अमेरिका के मुडीवाद को अपनाया तो कुछ देशों ने सोवियत यूनियन के साम्यवादको एक बार फिर दुनिया दो खेमो में बट चुकी थी बीच मे ऐसे कई विवाद हुए जिस से इन देशो के बीच तनाव बढ़ गए अमेरिका और सोवियत यूनियन कुछ भी कर के एक दूसरे को पीछे करने की होड़ में लग गये दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच तनाव इतना बढ़ चुका था कि एक छोटी सी चिंगारी भी विश्वयुद्ध में बदल सकती थी

atomic bomb
atomic bomb

तारीख 6 अगस्त 1945 के दिन अमेरिका ने सुबह सवा आठ बजे जापान के हिरोशिमा नामक शहर पर परमाणु बम गिराया जिस से इतना बड़ा विस्फोट हुआ कि एक बार के लिए तापमान 4000 डिग्री सेल्शियस तक पहोच गया, जो लोग बम के करीब थे वो तुरन्त भाप में बदल गए बाकी लोगो को बम फटने के बाद पैदा हुई आंधी ने अपने चपेट में ले लिया धमाके से काफी दूरी पर लोगो के घर गिर गए काच फुट गए मिनटो में पूरा शहर तबाह हो चुका था इस बम ने 80000 लोगो की जान कुछ क्षणों में ले ली

जापान पर गिराया हुआ परमाणु बम ” little boy “

दुनिया हैरान थी आज के पहले दुनिया ने कोई भी इतना तबाही मचाने वाला बम नही देखा था उस ज़माने में अखबारे बम की विनाशलीला ओ वाले आर्टिकल से भर गए पूरी दुनिया इस बम के विनाशक ताकत को देख रही थी लेकिन कुछ ही साल में सोवियत यूनियन ने भी 1949 में अपना पहला परमाणु बम बना लिया

 

Stanislav Yevgrafovich Petrov
Stanislav Yevgrafovich Petrov

26 सितम्बर 1983 मे स्टैनीस्लैव पेट्रोव  अपनी ड्यूटी पर थे तभी उन्हें स्क्रीन पर कुछ ऐसा दिखा जिसका अर्थ था कि अमरीका ने रूस पर मिसाइल छोड़ दी है नियम के मुताबिक  पेट्रोव का काम था उस सूचना को अपने ऊपरी अधिकारी तक पहुचाना पेट्रोव जानते थे कि उन्होंने ऐसा किया तो उसका अंजाम क्या होगा ,अब  दुनिया का आनेवाला भविष्य पेट्रोव के हाथ मे था उनके पास सिर्फ दो रास्ते थे या तो वे इस सूचना को अपने ऊपरी अधिकारी को दे या ये मानकर चले कि मशीन में कोई खराबी है , उन्होंने दूसरा रास्ता चुना ओर दुनिया एक विनाशकाली युद्ध से बच गयी बाद मे ये पता चला कि मशीन में सचमुच खराबी थी मशीन ने गलत आंकड़े दिखाए थे

दुनिया को परमाणु युद्ध से बचाने वाले स्टैनीस्लैव पेट्रोव का 77 साल की उम्र में निधन हो गया लेकिन दुनिया उनके उस दिन लिए हुए फैसले के कारण हमेशा एक हीरो की तरह याद रखेगी

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