किसानों के मुद्दों पर बन्द हो राजनीति, मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है

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किसानों के मुद्दों को लेकर राजनीति की जाती हैं। कभी गन्ने के भुगतान तो कभी गन्ने के मूल्यों को लेकर तरह-तरह की चर्चाए होती रहती हैं। गन्ने का नया मूल्य कोई घोषित नहीं किया गया। पिछले साल के भाव को ही यथावत रख दिया गया है। जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। साथ ही रासायनिक खादों व उर्वरकों, कृषि यंत्र, कीटनाशको के दाम आसमान छू रहे हैं।

वैसे तो चुनाव आते ही चुनावी पार्टीयों को किसान भाइयों की याद आने लगती है। पिछले वर्ष पेराई सत्र मई के दूसरे सप्ताह में बंद कर दिया गया था। लेकिन इस बीच किसानों को गन्ने का कोई भी पैसा नहीं दिया गया था। अब पेराई सत्र चालू हुआ तो पिछले सत्र का गन्ना भुगतान भी मिलो द्वारा किया गया। इस मुद्दे पर सरकार अपनी वाहवाही लूट रही है। सरकार को जब किसानों की इतनी ही चिंता थी तो गन्ने का भुगतान मिल बंद होते ही क्यों नहीं दिलाया गया था। किसानों के मुद्दों पर राजनीति बंद होनी चाहिए। यदि कुछ करना है तो वह धरातल पर होना चाहिए।

कर्ज माफी और ईंधन के दामों में कटौती सहित कई मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। सीएम योगी ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार भी किसानों की समस्या को लेकर काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अन्नदाताओं की समस्याओं को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं

कब तक किसानों को सरकार पर भरोसा करना होगा, जबकि कोई भी सरकार उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रही है। कब तक एक किसान परिवार के बोझ तले दबकर आत्महत्या करता रहेगा। क्या साल दर साल आने वाली सरकार को किसानों की चिंता नहीं करनी चाहिए।

आज का किसान महंगाई की वजह से कर्ज के बोझ तले इतना दब गया है कि उसको अधिक ब्याज दर पर साहूकारों से पैसा लेना पड़ता है जिसको वो समय पर नहीं चुका पता जिसका असर उनके बच्चों की शिक्षा पर विपरीत दिशा में होता हैं।