शाहपुरमंदी बांध परियोजना को मंज़ूरी मिली

हिंदुस्तान नदियों का देश है और नदियां इस देश की आत्मा है। जैसे मानो अगर हमारे शरीर की आत्मा निकल जाए तो हमारा शरीर बेजान हो जाएगा। वैसे ही अगर इस देश की नदियों को सुचारू रूप से व्यवस्थित ढंग से ना रखा जाए तो इस देश की आत्मा ही निकल जाएगी। इन्हीं आत्माओं में से एक रावी नदी की आत्मा भी इस देश की बहुत महत्वपूर्ण आत्मा है जिसकी बदौलत ही इस देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में ऊर्जा का संचार होता है।

यह नदी हिमाचल प्रदेश के चंबा से शुरू होती है और पंजाब के रास्ते होती हुई पाकिस्तान में घुसती है। पाकिस्तान के लाहौर से होती हुई यह नदी आगे चम्बल से जा मिलती है। चम्बल में मिलने के बाद यह आगे अरब सागर में जाकर गिरती है। इस नदी की लंबाई 720 किलोमीटर है। यह नदी सिंधु नदी की सृंखला में से एक है। पंजाब की छः नदियों में से एक रावी पंजाब की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। इस महत्व को समझते हुए सरकार द्वारा इस नदी पर शाहपुरमंदी बांध परियोजना की शुरुआत को लेकर गुरुवार को मंजूरी मिली।

हांलाकि शाहपुर मंदी बांध परियोजना का नियोजन सन् 2001 में ही कर लिया था परंतु आर्थिक तंगी और जम्मू-कश्मीर की नामंज़ूरी के कारण इस योजना को आगे नहीं बढ़ा जा सका। सन् 2003 में भी नीति आयोग द्वारा इस परियोजना को खूब सहयोग मिला। सन् 2009 में जल संसाधन मंत्रालय द्वारा भी एक रिवाइजरी कमेटी से भी अनुमोदन मिल गया था। और पंजाब सरकार द्वारा 2013 में इस पर काम शुरू तो हो गया था परंतु कम बजट के कारण फिर से रोकना पड़ा था।

इस साल सरकार द्वारा इसको पुख्ता रूप से शुरू करने के लिए केंद्र स 485 करोड़ का शुरुआती पैसा दिया गया है। और इस परियोजना को 2022-23 तक पांच साल में पूर्ण करने की बात कही गई है। इस परियोजना से रावी नदी द्वारा जो अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में बह जाता था उसको उपयोग में लाने के लिए और 206 मेगावॉट की बिजली को उत्पन्न करने के लिए सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है। इससे एक और फायदा यह भी होगा कि पंजाब के 5000 और जम्मू-कश्मीर के 13,173 हैक्टर जमीन की सिचाईं भी होगी जिससे वहाँ के किसानों को भी बहुत मदद मिलेगी।

                 :- टुडे माय इंडिया रिपोर्टर
                 :- अभिनव जैन