एक बेहतरिन वाक्य पिता का सम्मान

dad or son
एक 45 साल का बेटा अपने बूढ़े पिता के साथ शाम को घूमने निकला. बेटे ने सोचा अब घर से बाहर आये ही है तो क्यों ना किसी अच्छे रेस्टोरेंट में पिता जी को खाना भी खिला दू. दोनों बाप और बेटा एक बड़े से अच्छे रेस्टोरेंट में जाते है. पिता इतना बूढा है कि बेटा उन्हें हाथ पकड़ कर रेस्टोरेंट के अंदर लेकर आता है.dad or son
बाप ये देख कर बहुत खुश होता है कि बेटा उसे उसके सबसे पसंदीदा रेस्टोरेंट में लेकर आया है. किसी वक़्त बाप इसी रेस्टोरेंट में अपनी पत्नी और बच्चो के साथ खाना खाने आता था.
बाप ख़ुशी में अपने बेटे को बताता है कि ये वही रेस्टोरेंट है जहाँ मैं तुम्हे और तुम्हारी माँ को लेकर आता था. बेटा कहता है कि मुझे याद है पिता जी और इसीलिए मैंने सोचा कि आज इसी रेस्टोरेंट में खाना खाया जाए.
बेटा अपने पिता की सबसे पसंदीदा डिश यानि कि शाही पनीर आर्डर करता है. दोनों खाना शुरू करते है. चूँकि पिता बहुत बूढा और कमज़ोर है, कुछ खाना  उनकी कमीज पैंट पर भी गिर जाता है. ये देख कर रेस्टोरेंट में बैठे सभी लोग उस बूढ़े पिता को घूरने लगते है. सभी सोचते है कि इसे खाना भी नहीं आता. लेकिन उस बूढ़े बाप के बेटे को कोई फर्क नहीं पड़ता. बेटा बड़े आराम से अपना खाना खाता है और अपने पिता के खाने तक का इंतज़ार करता है. जब पिता अपना खाना खत्म करता है तो बेटा बड़े आराम से अपने पिता का हाथ पकड़ कर उसे वाशरूम ले जाता है और कपड़ो पर लगे दाग साफ़ करता है.
दाग साफ़ करने के बाद बेटा पिता के बालो में कंघी फेरता है और उनकी आँखों पर उनके चश्मे लगाता है.
जब दोनों वाशरूम से बाहर आते है तो रेस्टोरेंट में बैठे सभी लोग उन्हें घूरते है कि कैसे उस लड़के के पिता ने अपने बेटे का रेस्टोरेंट में मज़ाक बना दिया.बेटा बिना किसी की परवाह किये बिल देने जाता है. बिल देकर जब वे दोनों रेस्टोरेंट से बाहर जाने लगते है तो एक बूढा व्यक्ति उस लड़के की पीठ पर हाथ रखता है और कहता है, सुनो….
“तुम्हे नहीं लगता कि तुमने इस रेस्टोरेंट में कुछ छोड़ दिया”
बेटा इधर उधर देखता है और कहता है “नहीं सर, मैंने कुछ नहीं छोड़ा”
वो बूढा इंसान फिर बोलता है “नहीं तुम इस रेस्टोरेंट में कुछ छोड़ कर जा रहे हो और वो है इस रेस्टोरेंट में बैठे लोगों के लिए एक सीख”
“बेटा, तुम यहाँ बैठे हर एक बेटे के लिए एक सीख छोड़ कर जा रहे हो और हर एक पिता के लिए उम्मीद”
“मैंने आज तक ऐसा नहीं देखा कि कोई बेटा अपने पिता की इतने दिल से सेवा करता हो. अपने पिता की जैसे तुम सेवा कर रहे हो वो देख कर मेरी आँखें भी नम हो गयी और तुमने मेरे अंदर एक उम्मीद जगाई है कि शायद मेरा बेटा भी इसी तरह मेरी सेवा करे. धन्य है तुम्हारे माँ बाप जिन्होंने ने तुम्हे इतने अच्छे संस्कार दिए. बेटा, तुम ज़िन्दगी में खूब तरक्की करो और हमेशा खुश रहो”
उस बूढ़े आदमी ने उस बेटे को आशीर्वाद दिया और अपनी जगह पर बैठ गया और ये सब देख कर उस बेटे के पिता का सीना गर्व से 5 इंच और चौड़ा हो गया.दोस्तों, इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हम लोग इतने व्यस्त हो गए है कि अपनों के लिए वक़्त ही नहीं निकाल पाते लेकिन इस कहानी का मूल उद्देश्य यही है कि कभी कभी अपने माँ बाप या रिश्तेदारों के लिए वक़्त ज़रूर निकाले, उनकी दुआए आपको ज़िन्दगी में आगे बढ़ने का काम ज़रूर करेंगी। और उन्हें जो ख़ुशी मिलेगी उसका आप अनुमान भी नहीं लगा सकते.

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