नही बनेगा राम मंदिर फैसले की सुनवाई में आ रही है कठिनाइयां।

 

2019 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं और चुनाव नजदीक आते ही विजय की तरफ से राम मंदिर को लेकर राजनीति की शुरुआत हो चुकी हैं। चुनाव के नजदीक आते ही बीजेपी की मोर लेने की नीतियां शुरू हो जाती है और रमन दिखाओ बीजेपी हमेशा गोट लेने के चक्कर में आती है।

 

चुनाव नजदीक आते हैं हमें बीजेपी राम मंदिर को लेकर दिखाओ कि नहीं लगती है और चुनाव जाने के बाद सारा ही नेता राम मंदिर से कन्या काटने में रहते हैं।परसों साधु संत ने इस बार बीजेपी से नाराज दिखाते हुए कई सवाल पूछे हैं।

 

जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं तो बीजेपी के नेता राम मंदिर के नारे लगाने लगते हैं और चुनाव के जाने के बाद रंग के सवाल पर कोई जवाब नहीं देते और उनकी तरफ से कोई ऐलान नहीं करते। बहुत से लोगों का यह गाना है कि बीजेपी राम मंदिर जानबूझकर नहीं बनवा रही है।

 

क्योंकि सुपेला मंदिर की बात आती है और चुनाव नजदीक आते हैं तो उसको लेकर बीजेपी वोट मांग सकती है लोगों का कहना है कि बीजेपी राम मंदिर बनवाने के बारे में सोचती भी नहीं है और हमेशा ही सफर करने काटते रहती है जब चुनाव के दिन नजदीक आते हैं तो बीजेपी कैसे अपना चुनाव का काम निकाल सकती है।

दरअसल राम मंदिर का फैसला जनवरी में 10 तारीख को होना था जिसमें स्पेशल राम मंदिर के लिए एक बेंच का गठन किया गया था जिसमें 5 जज शामिल थे परंतु यह फैसला आगे की तारीख के लिए टाल दिया गया है।क्योंकि अभी इसमें फैसला आना बाकी है और कई तरह की अड़चन पैदा हो रही है।

 

जिसे लेकर हिंदू धर्म के लोग और साधु-संतों के नाराज दिख रहे हैं और यह बीजेपी के लिए मुसीबत बनती जा रही है। अब आगे जनवरी में देखते हैं कि इसका फैसला क्या आता है अगर इसका कुछ फैसला ना निकला तो बीजेपी के लिए बहुत ही मुसीबत हो सकती और उसको हमको चुनाव में बड़े मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और हार का भी।