कश्मीर : अलगाववादी नेताओं पर हर साल 14 करोड़ होते हैं खर्च, 600 जवान करते हैं सुरक्षा

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पुलवामा मे हुवे हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए कश्मीर के 6 अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा छीन लेने का फैसला ले लिया है. आपको बता दें कि पिछले एक साल में इन नेताओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने 14 करोड़ रुपए से ज्यादा कीी रकम खर्च की थी. इन छह नेताओं में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता मीरवाइज़ उमर फारूक, अब्दुल ग़नी बट्ट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी, शब्बीर शाह शामिल हैं.

600 से ज्यादा जवान करते हैं सुरक्षा

गौरतलब बात ये है कि अलगाववादी नेताओं पर होने वाले  जानलेवा हमलों के बाद सरकार ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला ले लिया था । अलगावादी नेता मीरवाइज फारूख और अब्दुल गनी लोन पर साल 1990 और 2002 में जानलेवा हमला हुआ था, गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों को माने तो सरकार इन 6 नेताओं की सुरक्षा पर हर साल करीब 14 करोड़ रुपए भी खर्च कर रही थी.

इनमें से 11 करोड़ सुरक्षा के, 2 करोड़ विदेशी दौरे पर और तकरिबन 50 लाख गाड़ियों पर खर्च हो जाते थे. इन नेताओं की सुरक्षा मे हर वक़्त 600 से ज्यादा जवान तैनात होते थे. साल 2018 में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2008 से लेकर 2017 तक अलगाववादियों को सुरक्षा मुहैया करवाने पर 10.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

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वापस ले लिया मोदी सरकार ने ?

 

मोदी सरकार की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, इन अलगाववादियों को दि गयी सुरक्षा और दूसरे वाहन वापस ले लिये गए हैं. इसमें कहा गया है, किसी भी अलगाववादी को सुरक्षाबल अब किसी सूरत में सुरक्षा मुहैया नहीं कराएंगे. अगर उन्हें सरकार की तरफ से कोई अन्य सुविधा दी गई है, तो वह सब भी तत्काल प्रभाव से वापस ली जाती है.

कश्मीर के एक अधिकारी ने बयान जारी किया है कि ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक, शब्बीर शाह, हाशिम कुरैशी, बिलाल लोन, फजल हक कुरैशी और अब्दुल गनी बट को अब किसी तरह का सुरक्षा कवर नहीं दिया जाएगा. इन नेताओं को दी जाने वाली सरकारी गाड़ियां और अन्य सुविधाएं छीन ली गई हैं

पाकिस्तान समर्थक माने जाने वाले अलगा ववादी नेता सैयद अली गिलानी और मोहम्मद यासीन मलिक ने पहले से ही सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था. गिलानी फिलहाल नजरबंद हैं लेकिन सरकार ने अलगाववादियों को दी जाने वाली सुरक्षा को गैरजरूरी करार देकर उन से सरी सुविधाएं वापस छिन ली हैं. सरकार के फैसले के बाद अब अलगाववादियों को कोई कवर या किसी भी तरह की सुरक्षा उपलब्ध नहीं करावाई जाएगी साथ ही मे उनसे सभी सरकारी गाड़ियां भी वापस ले ली गई हैं।

सख्त रवैया राजनाथ सिंह का 

पहमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि वे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) से संपर्क रखने वालों को दी जा रही सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी. हालांकि सुविधा वापस लेने के फैसले पर मीरवाइज ने कहा था कि सरकार ने खुद ही अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा देने का फैसला किया था. हमने कभी इसकी मांग नहीं की थी।

भारत सरकार अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा के लिए सालाना 14 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही थी

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