समय

time

ऐक मित्र ने अनायास ही ऐसे पूंछा।

दिल खोलकर उडेला मुंझ पर समूचा।।

लोग खेल रहे हैं हर किसी जज्बात से।
लड रहे अकारण छोटी छोटी बात पे।।
पर क्या तुम ऐसे किसी को जानते हो।
हो निर्मम निर्दयी किसको ये मानते हो।।
मै बोला हां हां मैं तो उसको जानता हूं।
पर सबसे अधिक मै उसी को मानता हूं।।
इस धरा पर वह अजर अमर निर्भय है।
सबसे निर्दयी निर्मम केवल ऐक समय है।।
ठहरना उसका काम नही राजा हो या रंक।
अच्छे बुरे पलों को भी कर लेता सुअंक।।
धूल मे मिलाता घमंडियों के मान को।
थोडा करवटले दिखाता उत्थान को।।
समय ने ही भिजाया रामजी वनबास को।
इसी ने ही दिलाया ज्ञान कालिदास को।।
समय ने ही लिखाया बडा बडा इतिहास।
सत्य का दर्शन कराया झूंठे का उपहास।।

Leave a Reply