नाकाम हो सकती है सरकार की छोटे व्यापारियों और कारोबारियों को लुभाने की नई नीति

ऑनलाइन बाजार में मनमानी करनेवालों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के द्वारा की जा रही एक आवास नीति व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को लुभाने में नाकाम हो सकती है विशेष लोगों का मानना है कि इस कदम के बावजूद सरकार को आगामी आम चुनाव में छोटे व्यापारियों का वोट पाने की उम्मीद का झटका लग सकता है

इससे छोटे व्यापारी नाराज हो जाएंगे और बीजेपी को वोट नहीं देंगे सरकार ने देश के छोटे और खुदरा कारोबारियों को राहत देने के लिए अगले साल 1 फरवरी से ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ नहीं और नीति लागू करने की मंजूरी दी है

इस कदम से अमेजन और बैल मार्ट मालिका हक रखने वाली फिलिपकार्ड जैसी कंपनियां के बंपर छूट की पेशकश और अनैतिक कारोबार पर रोक लगेगी फर्नीचर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज रेवरी का कहना है कि वर्ष 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी ने विदेशी कंपनियों के खुदरा बाजार में आने से रोक लगाने और घरेलू छोटे कारोबारियों के संरक्षण का वादा किया था इसके बाद देश में करीब 2.5 करोड़ों ने उनका समर्थन किया

लेकिन सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री ने अपना वादा भुला दिया कैंट के अध्यक्ष बी सी भरतिया ने बताया कि कंपनियों के बाहर छूट और कैशबैक जैसे आपसे छोटे व्यापारियों के मुनाफे में बड़ी कमी आई है और उनका मुनाफा अदा हो गया है उन्हें बड़े घाटे का सामना करना पड़ रहा है उन्हें अपने बच्चों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है हमारी 3 साल से जारी लड़ाई के लिए अब सरकार ने कदम उठाया है लेकिन फैसले लेने में काफी देर हो चुकी है