हमारे भारत देश में किसानों की आर्थिक दशा दयनीय क्यों हे ?

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हमारे भारत देश में किसानों की आर्थिक दरिद्रता किसी से छिपी नहीं हुई है इसका एक कारण यह भी है कि किसानों की याद बस चुनाव के वक्त आती है इसके अलावा किसान क्या करते हैं क्या खाते हैं इसको लेकर सरकार कभी गंभीर नहीं हुई और ना ही उनकी आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान दिया गया।

हमारे देश के किसान अत्यंत निर्धन एवं दरिद्र है सरकार ने सिर्फ चुनाव के वक्त ही बड़े-बड़े सपने दिखाती है जब सरकार बन जाती है तब फिर भूल जाती है फिर 5 साल बाद फिर याद दिलाती है कि हम आपका कल्याण करेंगे लेकिन ऐसा होता नहीं फिर क्या अनेक राजनीतिक पार्टियां किसान के हिमायती बन कर उनके सामने आती हैं लेकिन सब का नतीजा एक ही रहता है चुनाव के बाद कोई किसान का मुद्दा नहीं रहता सब को बस एक ही बात याद रहती है कि वोट बैंक कहां से आएगा शायद उन लोगों को यह नहीं पता हमारी अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्रोत कृषि भी है जिसे हमारे किसानों द्वारा किया जाता है जो अन्य देशों की तुलना में दयनीय है

इजराइल ने जहां अपने यहां बंजर खेती को सरकार के सहयोग से हरा-भरा बना लिया हमारे यहां उपजाऊ खेती भी बंजर होती जा रही हैं स्काई बस यही एक कारण है कि सरकार एवं राजनीतिक पार्टियां कभी किसान की ओर ध्यान ही नहीं देते हमारे देश में एक आंकड़ा आया था जिस आंकड़े के अनुसार भारत में हर 1 घंटे में एक किसान अपनी जान गवा देता है यानी आत्महत्या कर लेता है इसका प्रमुख कारण ये होता है कि वह अपनी फसल को कर्ज लेकर उगाता है जो कभी प्रकृति के कोप की भागी हो जाती है अता नष्ट हो जाती है

किसान का सब कुछ वही उसकी फसल होती है जो उसके आय का प्रमुख स्रोत है वह नष्ट हो जाता है जिसकी वजह से अत्यधिक तनाव के कारण किसान आत्महत्या कर लेते हैं यह हमारे देश की अजीब सी विडंबना है जो सबको भोजन देता है उसके पास कुछ नहीं होता कोई उसकी ओर ध्यान नहीं देता आज की हालत यह है कि किसान अब अपनी खेती छोड़ कर मजदूरी करने के लिए शहरों का रुख अपना रहे हैं

हमारे किसान इस कदर परेशान हैं कि वह बड़ी उम्मीद के साथ अपनी फसल को उगाता है जब उठती है तो उसे बाजार में ना तो उचित मूल्य मिलता है और ना ही उसकी फसल को सुरक्षित रखने के इंतजाम हो जाए कराएं जाते हैं अता किसान अपनी फसल ऐसे ही ओने पौने दामों में बेच देते हैं जो उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं होता हमारे देश के किसान हमारे देश की धुरी हैं अतः सरकार को इनका ध्यान देना चाहिए