कादर खान का जीवन परिचय ।

(कादर खान जीवन परिचय:-१९३७ से २०१९ तक का सफर)

सिनेजगत के जानेमाने अभिनेता और dialogue writer का १ जनवरी २०१९ को कनाडा के अस्पताल में देहांत हुआ, जिसका पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री और देश शोक मना रहा है। काफी दिनों से उनकी तबियत ठीक ना होने की खबरें आ रही थी, इससे पहले भी 2015 में उनके हेल्थ की समस्या के चलते उन्हें पतंजलि अस्पताल में एडमिट किया गया था और उनके मृत्यु की अफवाएँ उड़ रही थी, पर एक दिन सही सलामत वो हमारे सामने आये और इससे उन्हें चाहने वालों को राहत मिली।

काश की इस बार भी ऐसा होता पर अफ़सोस की वो अब हमारे बिच नहीं रहे, डायबिटीज और जॉइंट pain होने की वजह से उनकी तबियत हमेशा ख़राब रहती और वो व्हीलचेयर पर ही रहते थे,आखरी दिनों वो अपने बेटे के साथ कनाडा में रहते थे। मशहूर कादर खान की जिंदगी में काफी उतर चढ़ाव आये, आज तक उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है, और तक़रीबन 250 से ज्यादा हिंदी, उर्दू फिल्मों के लिए संवाद लिखे हैं, पर उनका ये सफर इतना आसान नहीं था, यहाँ तक पहुँचने के लिए उन्हें काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।

बचपन

कादर खान का जन्म १२ नवम्बर १९३७ को अफगानिस्तान के काबुल में हुआ, कादर खान उनके माता-पिता के चौथे संतान थे, इनसे पहले उनके तीन बेटे थे जिनकी किसी कारणवश बचपन में ही मृत्यु हो चुकी थी, कादर खान के जन्म के बाद उनके माता-पिता अफगानिस्तान छोड़कर भारत में स्थायी हो गये और मुंबई के किसी छोटेसे इलाके में रहने लगे जहाँ हर तरह की बुरी आदतें पायी जाती थी। इस दौरान उनके माता-पिता के बिच काफी तनाव बढ़ गया, जिसकी वजह से उनका रिश्ता टिक नहीं पाया और उनका तलाक हो गया। फिर कादर खान के माँ के परिवार ने उनके माँ की दूसरी शादी करा दी।

तब कादर खान बहुत छोटे थे, बचपन से ही उन्होंने अपने माँ को काफी मेहनत करते हुए देखा है। उनकी हालत इतनी गरीबी की थी की, उनके सौतेले पिता उनको कुछ पैसे मांगने के लिए उनके पिता के पास भेजते थे, उनको ऐसे माँगना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था पर फिर भी भूक की वजह से वो किसी तरह उनके पिता से एक-दो रुपऐ माँगने के लिए कई मील चलकर जाते थे, फिर उनके पिता कही से इंतजाम करके उन्हें वो पैसे देते क्योंकि उनके खुद के भी हालत कुछ खास नहीं थे, खुद कादर खान ने एक इंटरव्यूव में ये बात कहीं है की, उनके घर हफ्ते में तीन दिन खाना बनता था और तीन दिन वो भूके सोते थे, इतनी गरीबी होने के बावजूद उन्होंने इसका असर अपने पढाई पर कभी होने नहीं दिया।

पढाई

कादर खान ने अपनी प्राथमिक पढाई (primary education) मुंबई के एक सरकारी (government) स्कूल से की है, वो पढाई में काफी तेज़ थे तो उन्होंने आगे चलकर मुंबई युनीवर्सिटी के इस्माईल युसूफ कॉलेज से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरी कर ली। अपनी पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1970-1975 तक मुंबई युनीवर्सिटी में पढ़ाया और फिर उसके बाद, एमएच साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग बईकुला के सिविल इंजीनियर डिपार्टमेंट में उन्होंने बतौर प्रोफेसर काम किया। पर इसके अलावा उन्हें अच्छा लिखने और बोलने का शौक था। वो हर रोज़ रात को एक पुराने कब्रिस्तान में जाकर दिनभर में किसीसे भी और कहीं से भी जो कुछ भी सुनते उसे वो लिखकर जोर-जोर से पढ़ते थे।

एक दिन उन्हें ऐसे ही पढ़ते हुए कोई शख्स सुन लेता है और अपने बंगले में उन्हें मिलने बुलाता है, उनके वहाँ जाते ही उनके हाथ में कुछ लिखे हुए पन्ने थमाकर उन्हें पढ़ने के लिए कहा जाता है, और उसके बाद उन्हें एक ड्रामे में “मामक अजरा” नाम के किरदार को निभाने का मौका मिलता है और उसके लिए उन्हें 200 रुपए भी मिलते है जो उनकी पहली कमाई होती है बतौर अभिनेता। फिर वहाँ से उनका नाटक लिखने का और स्टेज पर अभिनय करनेका सिलसिला शुरू होता है।

अभिनय में कदम

उन दिनों कादर खान का एक “ताश के पत्ते” नाम का का ड्रामा काफी मशहुर हुआ था जिसे “आगा साहब” ने देखा, जो उस ज़माने के मशहुर कॉमेडियन थे, और उन्होंने इस प्ले का जिक्र दिलीप कुमार से किया और उन्हें इस प्ले को एकबार जाकर देखने के लिए कहा, क्योंकि उन्हें वो ड्रामा काफी पसंद आया था और उनके मुताबिक उस तरह के किरदार का उनके फिल्म में अच्छा उपयोग हो सकता था। दिलीप कुमार ने वैसे ही किया, उन्होंने उस प्ले को पूरा देखा और उसके ख़त्म होते ही वो बैकस्टेज चले गये और उन्होंने कादर खान को “बैराग” फिल्म में अभिनय करने का ऑफर दिया,

  (कादर खान फिल्म बैराग)

फिर अमिताभ बच्चन के “अदालत” फिल्म में उन्हें बड़ा रोल मिला, वो उनकी पहली बड़ी फिल्म थी जो उन्हें अमिताभ बच्चन की मदद से मिली थी, उसीके साथ उन्होंने प्रकाश मेहरा के “खून पसीना” फिल्म में विलेन का किरदार निभाया था और तब उन्हें विलेन के ही किरदार मिलने लगे, जो भी फिल्मे वो लिखते उन्हें अपने लिए विलेन करैक्टर ही लिखने पड़ते।

उन्हें फिल्मों में काम तो मिलता पर विलेन का पर उन्हें उनकी विलेन वाली इमेज ब्रेक करनी थी क्योंकि उनके बच्चों को स्कूल के दूसरे बच्चे चिढ़ाते थे, कादर खान के तीन बेटे हैं, एक कनाडा में रहता है और दोनों बेटे मुंबई में रहते हैं, इनमे से एक बेटा अभिनेता है जो सलमान खान के “तेरे नाम” फिल्म में काम कर चूका है। कादर खान को भारत और कनाडा का भी नागरिक्त प्राप्त है। अपने आखरी दिनों में वो कनाडा में ही अपने बेटे के साथ रहते थे। वो अपने माँ से बहुत प्यार करते, उन्होंने अपने माँ को हमेशा मेहनत करते हुए देखा था,

उनका वही हमे उनकेद्वारा लिखे कई सवांदों में सुनने मिलता है। बीमारी की वजह से उनके माँ की मृत्यु उसी वक्त हुई थी जब वो स्टेट लेवल के प्ले करते थे।उन्हें अपनी विलेन की इमेज को तोडना था और तभी उन्हें “हिम्मतवाला” फिल्म मिली, जितेंद्र और श्रीदेवी की ये फिल्म थी, जिसमे उन्हें सवांद भी लिखने थे, फिर क्या ? उन्हें मौका मिला, जिसका उन्होंने पूरी तरह से उपयोग किया और उनके कॉमेडी का दौर शुरू हुआ। और आज भी उनके फिल्मों का हर डायलॉग लोगो में जान भर देता है।

परिवार

कादर खान की शादी मुंबई में ही अज़रा खान से हुई थी उनके तीन बेटे है, सरफ़राज़ खान, शाहनवाज़ खान और quddus खान, उनका एक बेटा कनाडा में रहता है तो दो मुंबई में ही रहते है, जिनमेंसे सरफ़राज़ खान अभिनेता है, उनकी माँ का नाम इक़बाल बेगम और पिता अब्दुल रहमान खान है.

kadar khan and his wife

(कादर खान अपनी पत्नी के साथ)

 

(कादर खान अपने दोनों बेटो के साथ)

(कादर खान अपने पोते और पोती के साथ)

 

 

अवार्ड्स

1982 में “मेरी आवाज सुनो ” फिल्म के लिए बेस्ट डायलॉग के लिए पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला था. फिर बाप नंबरी बेटा दस नंबरी, अंगार, कुली नंबर वन, सिक्का, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, साजन चले ससुराल, हिम्मतवाला, दुल्हे राजा इन फिल्मों के लिए कादर खान को बेस्ट फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया|

दुखद

सबको हँसाने वाले कादर खान १ जनवरी २०१९ को इस दुनिया को अलविदा कहकर चले गये। वो तो चले गये , पर अपनी फिल्में, सोच और यादों को पीछे छोड़ गये, जो किसी भी ड्रीमर को हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी और अपने कोशिशों पर यकीन करने का भरोसा देंगी।

अगर तुझे यकीन हो खुद पर

तो लगा ले इक दाँव अपने ख्वाबों

पर। मंजिल एक दिन जरूर मिलेगी,

बस छोड़ ना देना अपनी कोशिशों का

दामन।