Bogibeel bridge: 2018 के आखरी दिनों में देश को मिला तौफा, देश का सबसे लंबा पूल बनकर हो गया तैयार, पीएम नरेंद्र मोदी ने किया उसका उद्घाटन।

असम के ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पूल देश का सबसे लंबा रेल-रोड पूल है। जिसे बनाने के लिए ब्रम्हपुत्र नदी की चौड़ाई तक कम करनी पड़ी जो की 10.3km थी और फिर उसपर 4.94Km का बोगीबील पूल बनाया गया जो देश का सबसे लंबा रेल-रोड पूल साबित हुआ। इसे बनाने में तकरीबन 6 हज़ार करोड़ तक का खर्च हुआ। 16 साल के हमारे इंजीनीर्स के मेहनत से बना ये अनोखा रेल-रोड पूल, जो देश के लिए हो सकता है काफी मददगार साबित।

 

अरुणाचल प्रदेश में चीन की चुनौतियों का सामना करने में और भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने में बोगीबील ब्रिज की काफी होगी सहायता। ये पूल इतना मजबूत है की उसपर से टैंक भी गुज़र सकते है और वहां विमान भी उतर सकते है।  इस पूल की वजह से लोगों को को मिलेगी राहत। उनका सफर करना काफी होगा आसान, पहले के मुकाबले जो सफर करने का समय है उसमे 4 घंटे की होगी बचत।

 

पूल का इतिहास:

1985 में एक असम समझौता हुआ जिसमे इस पूल को बनाने की बात हुई।

1997-98 में नरसिंह राव की सरकार में इस पूल को बनाने की स्वीकृति मिली।
22 जनवरी 1997 को प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया।
2002 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार में बोगीबील रेल-रोड ब्रिज के निर्माण का काम शुरू हुआ।

 

2007 में बोगीबील ब्रिज को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहद्वारा राष्ट्रीय प्रोजेक्ट का दर्जा दिया गया।

25 दिसंबर 2018 को पुर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूल का उद्घाटन किया।

 

बोगीबील रेल-रोड ब्रिज की विशेषताएं:

देश का पहला सबसे लंबा रेल-रोड पूल।

ये एक डबल डेकर पूल है।

इसके निचले हिस्से में दो रेल लाइनें हैं और ऊपर तीन लेन की सड़क है।

ये पूल धेमाजी और डिब्रूगढ़ को जोड़ता है और इसकी वजह से ४ घंटे तक का समय बच सकता है।

देश का ये पहला भूकंप रोधी पूल है।

ये पूल इतना मजबूत है की यहाँ से टैंक भी गुज़र सकते है और इसपर विमान भी उतर सकते है।