अभिव्यक्ति की आजादी का नाजायज फायदा।

freedom of expression

देश में बोलने का अधिकार के तहत आम नागरिक हो या नेता अनपढ़ हो या पढ़ा लिखा सभी इस प्रकार को अधिकार का भरपूर फायदा लेने का अधिकार है पिछले दिनों जम्मू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर द्वारा शहीद भगत सिंह को आतंकी बताना फिर सपा के बड़े नेता द्वारा वीर सावरकर को गद्दार कहना बोलने के अधिकार का हनन नहीं है तो क्या है।

इसी तरह बुलंदशहर में उग्र भीड़ द्वारा गौ हत्या के विरोध में एक पुलिस अधिकारी की मौत में जो आजादी है वह अधिकारों के अनुरूप है क्या संविधान मैं जहां हमारे अधिकारों का जिक्र किया गया है वहीं देश के प्रति हमारी कुछ सीमाएं और रेखाएं और कर्तव्य भी है जिनका हमें ख्याल रखना चाहिए और अपनी अभिव्यक्ति का नाजायज फायदा नहीं उठाना चाहिए आजादी का मतलब कानून हाथ में लेना नहीं हो सकता समाज के हर तबके में यह भ्रम पैदा हो गया है कि भीड़ की शक्ल में कुछ भी किया जा सकता है कोई कुछ नहीं कहेगा अबे भर्म टूटना चाहिए इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने वाले भावनाओं को सम्मान करना आदर करना शारीरिक व मानसिक कष्ट ना पहुंचाना भी शामिल है अधिकारों के इस्तेमाल से ज्यादा कर्तव्यों का निर्वाह करना जरूरी है।

जनता के कदम को जिम्मेदार के रूप में देखना चाहता देश का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा है धर्म है कि हम अपने देश एवं उसकी संपदा ओं का बा को भी फायदा उठाया और अपना कर्तव्य का निर्वाह करें