तीन तलाक बिल के लिए बजट सत्र में जोर लगा सकती है सरकार।

tripel talaq bill

लोकसभा चुनाव होने से पहले 25 जनवरी से शुरू सोने वाले संसद का अंतिम शासक टेबल सांकेतिक नहीं होगा मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की सियासत के लिए समय के अनुकूल माने जाने दिल मसलन तीन तलाक और नागरिकता बिल संशोधन पर एक बार फिर हाथ आजमाने की सोच सकती है।

इसके अलावा सरकार उन दिनों को chutney करने में जुट गई है जिस में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी को एक सुखद संदेश दिया जा सके तीन तलाक बिल बीते सत्र में दोस्तों से नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा की दूरी पार नहीं कर पा रहे हैं एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक तीन तलाक आधार कानून संशोधन और प्रेसीजन विल सहित उनके 12 बिल को अलग करने का सिलसिला जारी है जिसको अंतिम सत्र में पेश किया जाएगा

सरकार लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपने मुख्य बिल तीन तलाक पर खासतौर से ध्यान देगी साथ ही मुस्लिम महिलाओं और नागरिकता मिल के जरिए बहुत संख्या क्षमताओं को सकारात्मक संदेश देना चाहेगी तीन तलाक बिल में जहां तलाक एक विवादास्पद के लिए 3 साल की सजा है वही नागरिकता बिल में पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए शरणार्थी के रूप में हिंदू सिखों पार्टी और ईसाइयों की नागरिकता देना शासन में शामिल करने का प्रावधान है