सवर्ण आरक्षण: क्या ये मुमकिन है की बिना किसी मौजूद आरक्षण को छेड़छाड़ किये, १० फीसदी सवर्ण आरक्षण मिलना या फिर खेला जा रहा है कोई चुनावी दाव, जानिये क्या है ये मामला।

General Reservation

मोदी सरकार की पहल :

 

मोदी सरकार ने लिया एक फैसला, सवर्ण (सामान्य वर्ग) को आर्थिक स्थिति के आधार पर (शैक्षणिक और नौकरियों में ) १० फीसदी आरक्षण देने का लेकिन जो पहले से तय ५० फीसदी आरक्षण है उसे बिना छेड़छाड़ किये, जिसके लिए सरकार को बढ़ानी होगी।आरक्षण की सीमा ५० फीसदी से ६० फीसदी। इससे पहले भी अलग अलग वजहों को आधार बना कर राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा आरक्षण मांगने की कई ऐसी कोशिशें हुई। पर सुप्रीम कोर्ट में जाकर वो सारी नाकामयाब हुई। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार आरक्षण की सीमा सिर्फ ५० फीसदी हो सकती है।

 

१९९२ में सुप्रीम कोर्ट ने फिसला लिया था। की जो आरक्षण देश की समानता को नष्ट करेगा उसे लागू किया नहीं जायेगा, पर २०१० में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से एक फैसला सुनाया। की किसी भी राज्य या केंद्र सरकार की मांगपर ये सीमा बढ़ाकर आरक्षण दिया जा सकता है, पर उसके लिए ठोस, उचित, साइंटिफिक कारण होने चाहिए। तो सरकार इन्ही कोशिशों में है की किस तरह से वो आरक्षण की सीमा बढ़ा सकती है। वैसे सरकार के पास reason तो सामान्य लोगों के हित का ही है।

 

और अगर वो पहले से तय आरक्षण में बिना बदलाव किये इस आरक्षण को लागु करना चाहती है तो इसके लिए सरकार को कई परीक्षाओं से गुज़रना होगा, हलाकि बात सामान्य वर्गों की है तो विपक्ष में इस बिल को कोई खुलकर विरोध नहीं कर रहा, पर विपक्ष की ओर से बिल के सांविधानिक और कानूनी पहलु को लेकर कई सवाल उठाये जा रहे है।

 

संविधान संशोधन बिल की क्यों पड़ी जरूरत :

सरकार जिस आरक्षण की पहल कर रही है, वो आर्थिक स्थिति के आधार पर है, पर संविधान के article 15 और 16 में समाज के पिछड़े जातियों के लोगों को शैक्षणिक और नौकरियों में आरक्षण देने का प्रावधान है, डॉ. भीमराव आंबेडकर ने आरक्षण की व्यवस्था इसीलिए की थी क्योंकि वो चाहते थे की जो पिछड़े हुए लोग है उन्हें सशक्त बनाया जाये और उन्हें समानता से जीने का अवसर मिले जो उस वक्त नहीं होता था, और इसका समय समय पर मूल्यांकन होना जरुरी था, जो नहीं होता, आज कल की राजनैतिक पार्टिया हर समस्या का समाधन ढूंढ़ने से ज्यादा उसकी राजनीती करने में लगी रहती है।

 

इस आर्थिक स्थिति पर आधारित आरक्षण को लागु करने के लिए ये संविधान संशोधन बिल संसद में शामिल किया गया, इसपर काफी बहस होने के बाद ८ जनुअरी को 223 मतों से ये बिल लोकसभा में पास हो गया, सिर्फ 3 मत इस बिल के खिलाफ थे। ९ जनुअरी २०१९ को इस बिल को राजयसभा में रखा जायेगा इसे पास होने के लिए तकरीबन 163 मतों की जरुरत पड़ेगी। क्या ये चुनौती पार कर पायेगी सरकार ?

 

आर्थिक आधार पर आरक्षण का इतिहास :

आर्थिक आधार पर आरक्षण का ये मामला नया नहीं है, इससे पहले भी इसपर कई कदम उठाये जा चुके है, पर नतीजे तक नहीं पहुँचाया गया। जुलाई 2006 में मेजर जनरल रिटायर्ड एसआर सिन्हो के अध्यक्षता में EBC( इकोनोमिकल बैकवोर्ड क्लास ) कमीशन बनाया गया था, इस आयोग का काम पिछड़े वर्ग के लोगो की पहचान और हालत जानने का था, इस आयोग ने चार साल में इसपर काम किया और २०१० में इसकी रिपोर्ट तैयार करके दे दी, लेकिन उसके बाद इस रिपोर्ट पर 8 साल तक मतलब २०१८ तक कोई कदम उठाया नहीं गया और २०१९ में मोदी सर्कार ने ये फैसला लिया।

 

क्यों कहा जा रहा है इसे मोदी का मास्टर स्ट्रोक :

सुंत्रों के अनुसार, कुछ दिनों पहले मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को पलट दिया था और वो फैसला था SC-ST एक्ट के संशोधन का, जिससे सवर्ण(सामान्य) वर्ग नाराज हो गया, जिसका असर पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में देखने मिला, मोदी सरकार को तीनों राज्यों बड़ी हार मिली, बीजेपी के जीत के लिए सवर्ण वर्गों के वोट हमेशा से निर्णायक रहे हैं, बीजेपी के वो CORE वोटर रहे हैं।

 

अभी लोकसभा चुनाव कुछ ही दिनों में आने वाले है, UP में बीएसपी और समाजवादी पार्टी में गठबंधन कर लिया है, जबकि UP एक बड़ा राज्य है और वहा सवर्ण वर्गों के वोट काफी important हैं। तो शायद इसीलिए चुनाव के कुछ ही दिन पहले मोदी सरकार को ये आरक्षण बिल लेकर आना पड़ा, ऐसा माना जा रहा है और अगर चुनाव से पहले सवर्ण आरक्षण लागु हो गया तो मोदी सरकार के लिए लोकसभा चुनाव के नातीजे तीन राज्यों के विधानसभा राज्यों से काफी अलग होंगे, मोदी इसका फायदा जरूर मिलेगा।

 

किसे मिल सकता है आरक्षण :

  • हर व्यक्ति जिसकी सालाना आय ८ लाख रूपये से कम है।
  • जिसके पास ५ एकड़ से कम कृषि भूमि है।
  • जिसके पास १००० वर्ग फ़ीट से कम क्षेत्रफल के मकान/ घर है।
  • ऐसी बहुत सी सारी बातें देखी जाएँगी आरक्षण के पात्र होने के लिए।

अब ये तो वक्त हि बातयेगा की, जो पहल मोदी सरकार ने की है, क्या वो उसे अंजाम तक लेकर जायेगे, जो उम्मीदे लोगों के दिलों में उन्होंने जगायी है, क्या उसे मोदी सरकार पूरा कर पायेगी, क्योंकि राजनीती करने के लिए लोगों के इमोशन का उपयोग नहीं किया जा सकता।

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