आधुनिकता में समाप्त होती मानवता

आज आधुनिकता के युग में मनुष्य मिलन होता चला जा रहा है उसे अपनी मानवता एवं अपने सामाजिक कार्य को ढूंढता चला जा रहा जो एक तरह से उसके लिए ठीक नहीं

हमारे जीवन में आधुनिकता का इतना असर हो रहा है कि जहां पहले लोग एक दूसरे से लगाव महसूस किया करते थे आज के जमाने में लोग अनजान रहते हैं जो हमारे सामाजिक जीवन में एक बुरा प्रभाव होता है आधुनिकता के जीवन में हम इतने नाम लिप्त हो जाएं कि कहीं हम अपने कर्तव्य को भुला बैठे इसलिए हमेशा आधुनिकता के अलावा मानवता की शिक्षा अपने बच्चों को जरूर दी जानी चाहिए ताकि बच्चों में आधुनिकता के लव के अलावा मानवता के कर्तव्य सिखाएं जाएं

हमेशा हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मानवता ही मनुष्य का सर्वोपरि करना है अर्थात जिसके अंदर मानवता नहीं वह किसी पशु से कम नहीं है हमें अपने अंदर की मनुष्य एवं उसकी मानवता को जगाए रखना चाहिए हम सदैव इस बात का ध्यान रखें कि हम लोग कर रहे हैं उससे दूसरों को तो कोई नुकसान तो नहीं है हमें अपने आप को इस तरीके से पेश करना चाहिए कि सामने वाले को कोई दिक्कत ना हो मानव जीवन हमारे जीवन एक बार मिलता है जिस को संभाल कर रखना एवं उसको सबके सामने उदाहरण बनाकर पेश करना मानवता के द्वारा ही किया जा सकता है

एक मानवता के राम को महान बनाया था और हम अपने कर्तव्यों का निर्वाह अपने समाज के अनुसार करना चाहिए आधुनिकता के इस चकाचौंध में हम अपनी मानवता को नाखून है इस बात का हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है की मानव धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है अर्थात मानवता ही सबसे बड़ी माया है जिसके अंदर मानवता नहीं वह पशु के समान है मानवता ही हमारे जीवन का आधार है इसे ही हमें जीवन का आधार बनाकर ही रखना चाहिए

दुनिया हमें जब भी याद करती है तो वह आधुनिकता की वजह से नहीं बल्कि आप की मानवता की वजह से आपको अपनी मानवता का सदैव ध्यान रखना चाहिए और उसी के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए

हमारे सामाजिक जीवन में हमारा व्यवहार ही हमें सबसे अलग बनाता है साधु के पास आधुनिकता ना होते हुए भी उसे महान कहा जाता है उसकी मानवता के कारण महान कहा जाता है जबकि दुष्ट व्यक्ति के पास आधुनिकता होते हुए भी उसे सिर्फ गालियां ही मिलते हैं आधुनिकता एक सीमित है मानवता मानवता असीमित आपको नाम देती है जो आप आधुनिकता से नहीं कमा सकते