डॉ भीमराव अंबेडकर हमेशा याद रहेंगे

dr bhim rao ambedkar

Dr Bhim Rao Ambedkar14/अप्रैल/1891 — 6/दिसम्बर/1956

राजधानी दिल्ली के चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था।
तभी अचानक से भारत के चरों महानगरों में फ़ोन की घंटियों की आवाज़ सुनाई दी । अगली सुबह संसद, राजभवन तथा राष्ट्रपति भवन समेत सारे देश में शांति का माहौल उत्पन्न हो गया। आखिर यह देश को हुआ क्या है क्यों यह ऐसा शोक मनाया जा रहा है यह भारत के वासियों के लिए किसी आपदा से कम नहीं था भारत में चलने वाली ट्रेने जो सारे देश से मुम्बई को जा रही थी इन ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं थी।कोई अचानक हमें छोड़कर चला गया था।आज के दिन हमारे बीच डॉ भिंरो आंबेडकर जी नहीं रहे थे ।
मुम्बई जो देखते ही देखते अरब सागर वाली मुम्बई जन सागर में तब्दील हो गई देश में यह पहला प्रसंग था जब देश में बड़े बुजुर्ग छोटे बच्चों की तरह रोने लगे जब चन्दन की चिता पर उसे रखा गया तो लाखों दिलों की आवाज़ थम सी गई। जिसने भारत के भविष्य के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। आज हम उसी को ही भूल चुके है।
परंतु क्या आज जाती,रंग तथा नस्ल के भेदभाव को ख़त्म कर दिया गया है क्या जिस अम्बेडकर ने श्रेष्ठ भारत का सपना देखा था क्या वह पूरा हो गया है आज भी हम इन मामलों में पीछे है भारत के संविधान के निर्माण के बाद भी आज भारत पिछड़े गरीब लोगों को न्याय नहीं मिल पाया है इसका सकारात्मक उपयोग होने के बजाये राजनितिक रूप से नकारात्मक उपयोग होने लगा है आज आरक्षण तथा जातिवाद के नाम पर वोट मांगे जाते है परंतु आज सच में अम्बेडकर जी की कमी महसूस हो रही है उन्हें भुलाना हमारे लिए मुश्किल है। वह भारत देश की आत्मा थे आज एक संविधान के रूप में हमे एक ज्योति प्रदान करके गए है जिसने इस देश को एकता के सूत्र में बाँध रखा है।

:- गुरप्रीत सिंह
:- दिल्ली विश्वविद्यालय