तो इसलिए अघोरी खाते हैं मुर्दा लोगों को।

aghori baba

अघोरी नाम सुनते ही मन में एक बहुत ही छोटा सेल व्यक्ति और पूरे शरीर पर राख लपेटे हुए इंसान नजर आते हैं जिसकी आंख लाल और मस्तिष्क बेटी का और पूरा शरीर राख से लगता हुआ सुनकर ही एक भयानक सा डर शरीर में जल जाता है पर देखा जाए तो लॉग इनको भगवान की तरह पूजते हैं जिनको अघोरी कहा जाता है वैसे अघोरी की जिंदगी इतनी आसान नहीं और ना ही यह दिखाई देते हैं यही बात सच है कि यह जिस को आशीर्वाद देते हैं वह हमेशा खुश रहता है पर अघोरियों में यह खास बातें की जाती है कि वह कभी किसी को जल्दी से अपना आशीर्वाद नहीं देते।

अघोरी यह बहुत ही परेशान से शेर अपने पूरे जीवन व्यतीत करते हैं। अघोरी बहुत ही कठिन परिश्रम और तब से ही वह एक सत्य अघोरी बाबा बन पाते हैं उनको अपने तब से पहले और अघोरी बनने से पहले उन्हें पूरे समाज का मित्र का घर परिवार का सबका त्याग करना होता है। वह संन्यास लेने से पहले अपने सभी परिजनों को और सभी शुभ संबंधित साथी को छोड़ते हुए वह अपना खुद का श्राद्ध करते हैं। इसका मतलब यह है कि वह पूरी दुनिया से अपना रिश्ता तोड़ लेते हैं और वह अपने तो अपने ही ध्यान देते हैं इस पश्चात व श्मशान में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि वहां उनको तब करने में कोई भी समस्या और कोई भी विलंब ना नहीं आती और वहां पर रात में ना कोई आता जाता है।

अघोरियों को भगवान शंकर का पांचवा रूप माना जाता है देखा जाए तो अघोरी रात में श्मशान में तब करते हुए नजर आते हैं क्योंकि उनका मानना यह है। कि रात में उनको तब करने में कोई बाधा नहीं आती और ना ही कोई उन्हें परेशान करने आ सकता है जो जिससे उनके तक में कोई भी कदम पड़े वह लाशों पर बैठ कर या फिर लाशों के अगल बगल में गिरा बनाकर तक करते हैं। अघोरी कोई भी मास खा जाते हैं और कोई भी जीव जंतु वह खा सकते हैं चाहे वो जीव-जंतु मराव चाहे कैसा भी देखा जाए तो वह अपनी गिना करने की खुशबू वधू सब कुछ भूल कर एक अलग ही दुनिया में हो जाते हैं। जिनसे उनका समाज से कोई लेन-देन नहीं होता और कड़े तब के बाद का घोड़ी बन जाते हैं। जिनको भगवान भी माना जाता है और कई लोग उन्हें देखने और मिलने आते हैं और उनका आशीर्वाद लेने आते हैं।