दिल्ली का प्रदूषित पानी हुआ जानलेवा रहना हुआ मुश्किल

मनुष्य जीवन के लिए जल कितना महत्वपूर्ण है यह हम सभी अच्छे से जानते है। फिर भी मनुष्य द्वारा जल को प्रदूषित करने में कोई कमी नहीं रही हैं जिसकी वजह से जल प्रदूषण, सभी प्रदूषणों में सबसे अधिक हानिकारक प्रदूषण हो गया है। यह प्रदूषण पानी में फैली अशुद्धियाँ है जो कई कारणों से पानी में आ सकती है। अमूमन यह अशुद्धियाँ पानी में पूजा की सामग्री प्रवाहित करने से, उद्योगों के केमिकल से, और गाँवों के लोगों द्वारा अपने मवेशियों को नहलाने से, कपड़े धोने से और खुद स्नान करने से फैलती हैं। प्रदूषण हमेशा नदियों, तालाबों, नहरों, या किसी भी खुले पानी में देखा जा सकता है। ज़मीनी पानी में प्रदूषण ना के बराबर होता है।

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भारतीय धार्मिक रीति-रिवाजों में कई ऐसे पर्व आते है जिनमें मूर्तियों की पूजा की जाती है तदोपरांत एक निश्चित समय अनुसार धार्मिक मान्यताओं के चलते उन्हें नदियों, तालाबों, या नहरों में प्रवाहित कर दिया जाता है वरना पूजा अधूरी मानी जाती है। परंतु लोगों को यह समझ नहीं आता कि इससे ना सिर्फ उन्हीं के पानी में प्रदूषण बढ़ता है बल्कि इस प्रदूषण से पानी की मछलियां भी मर जाती है। जिससे पानी में और भी प्रदूषण बढ़ता है।

प्रदूषित पानी के सेवन से मनुष्य के शरीर में कई जानलेवा बीमारियाँ जन्म लेती है। अभी आई एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली एनसीआर में पीने के पानी में इतना प्रदूषण पाया गया है कि इससे अस्पतालों में दी जा रही दवाई तक का असर बंद हो गया है और कई मरीज़ों की मृत्यु तक हो चुकी है। दिल्ली में जो पेयजल आता है उसमें ईकोलाई, क्लबजेला, स्टेप्टोकॉकस एवं कोलीफार्म जैसे कई ऐसे बैक्टीरिया पानी में पाए गए जिससे शरीर में डायरिया, हैजा, निमोनिया आदि कई रोगों का जन्म होता है।

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