सभ्यता और संस्कृति और उनका इतिहास

civilization and culture

किसी भी आंचल या धरती के टुकड़ों की लोक संस्कृति तत्कालीन लोक मानस हुई परिस्थितियों आकृतियों पर जब संस्कृति का परिवर्तन वह होता है तो सहज ही स्वाभाविक है कि उनका रक्षण ना किया जाए तो वह इतिहास बन जाती है लेकिन ऐसे अनेक प्रमाणिक सच मौजूद है जिन से सिद्ध होता है कि लोक संस्कृति एक गतिशील प्रक्रिया है उसका अपना एक इतिहास है

अगर वह युग के अनुरूप ना चलते तो पीले पत्तों की तरह झड़ जाती है उसका नामोनिशान ना रहता वह किसी राजा की सी सामंत या विशिष्ट नाम की परवाह नहीं करता बना लो को प्रवृत्तियां और लोग दशाओं का लेखा-जोखा पेश करता है वह समय है

इतिहास चेतना लोक संस्कृति इसलिए उपयोगी है कि उससे अतीत वर्तमान और भविष्य की काल चेतना का मानचित्र सामने रहता है जिससे लोग अपनी चेतना और आचरण का प्रवाह की दिशा तय करता है इतना ही नहीं अनेक समस्याओं के इतिहास चेतना की सोच मदरसा और वर्तमान काल की लोक संस्कृति स्थिति लोग समस्याओं को भी साफ-साफ पढ़ लिया जाता है असल में लोक संस्कृति के अंगों उपाय जैसे लोक मूल्य लोक आचरण लोक साहित्य लोक कलाएं व्यक्ति विशेष भागीदार होता हुआ इतिहास है यदि आपकी इच्छा या पहचान मिलती है और भविष्य में नष्ट हो जाती है तो इसे इतिहास ही बोलेंगे यह बजा है कि इतिहास योजना तो जटिल है पर कॉल करो या ऐतिहासिक युग के अनुसार लोक संस्कृतियों की नाप जोख की जा सकती है

यदि कहीं उसकी छाया सभ्यता की पहचान मिलती है तो उसका पूरा परिचय दुर्लभ हो जाता है इसकी वजह से तिथि भर इतिहास योजना तो जटिल है और मुश्किल भी वैज्ञानिक युग में बहुत देखता का दबाव जीवन के हर क्षेत्र में इतना बढ़ गया है कि भावुकता प्रधान प्रवृत्तियां बहुत पीछे चली गई पल्सर रूप संस्कृत में काफी सुकून कर सीमित होने लगे नगरों ने गांव को शिकंजे में जकड़ रखा है ऐसा