2030 तक इस ईंधन से चलेंगी गाड़ियाँ

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भारत में प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप के कारण सरकार इससे बचने के उपाय खोज रही है। इसी मोहिम में भारतीय सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है कि क्यों न गाड़ियां बनाने वाली सभी कंपनियों को नेचुरल गैस (सी.एन. जी) से चलने वाली गाड़ियां ज़्यादा बनाने को कहा जाए। इसके ऊपर दो कंपनियों मारुति सुजुकी और ह्यूंदई ने काम करना भी शुरू कर दिया है। यहां तक की ह्यूंदई ने सैंट्रो का जो नया मॉडल मार्किट में उतारा है उसमें भी सी.एन.जी. वैरियंट की माँग ज्यादा है।

सरकार ने अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी के लिए एक सी.एन.जी. प्लांट लगाने की भी बात सामने रखी है। जिसके तहत अगले 10 साल में 10,000 नए सी.एन. जी. स्टेशनों को खोलने की बात कही गई है। यह स्टेशन 124 जिलों में खोले जाएंगे जहाँ अभी तक इसकी पहुंच नहीं है। इसके अलावा पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पी एन जी आर बी) द्वारा इसके लिए शहरों में 10वें राउंड का ऐलान किया है।

अभी तक देश में 1,424 सी.एन.जी. स्टेशन मौजूद हैं। जिसका प्रदूषण पर खासा असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। ह्यूंदई द्वारा इस साल की पहली छमाही में 55,000 यूनिट सी.एन. जी. की बिक चुकी है। और कंपनी द्वारा कहा गया है कि उम्मीद है इसकी संख्या हर वर्ष बड़ रही है।

सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से देश में कई नौकरियों में भी इजाफ़ा होगा। जिससे बेरोजगारी में गिरावट आएगी। सी.एन. जी. स्टेशनों में वृद्धि से क्रूड ऑयल के इंपोर्ट में भी कमी आएगी जिससे सरकार को सालाना 11 लाख करोड़ की बचत होगी। इससे बड़े-बड़े शहरों का प्रदूषण का स्तर भी दिन-प्रतिदिन घटेगा।

दिल्ली-एनसीआर में ओला-उबर चालको को भी इससे बहुत फायदा होगा। और-तो-और ऑटो ड्राइवरों को इससे बहुत मदद मिलेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसा देखा गया है कि सीएनजी में पीएम 2.5 और पीएम 10 पार्टिकल सी एन जी में नहीं के बराबर पाए जाते है। जिससे प्रदूषण कम होता है।