बर्बाद हो सकता है पाकिस्तान बढ़ रही है इमरान खान की मुश्किल है

प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान सरकार पिछले दिनों अपने पहले 100 दिन के कामकाज के रिपोर्ट जारी की है जिसमें अपनी संवैधानिक विधि 2023 तक पूरे होने तक पाकिस्तान आर्थिक और हर क्षेत्र में तरक्की बाल करने की बात चाहता है

बदहाल रिपोर्ट में यह दर्शाती चुनाव से पहले इमरान खान या उनकी पार्टी जनता से जो वायदे किए थे उन पर कोई अमल नहीं कर किया तो किस हद तक तो मैं किस हद तक होगा चुनाव से बाद में ऐसा नजर आता है कि जो पिछली सरकारों से अलग हो इसलिए पाकिस्तान की जनता मायूसी का शिकार हो रही है पाकिस्तान दिवालियापन की तरफ बढ़ रहा है

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद अब्बास इमरान खान को पाकिस्तान का डोनाल्ड ट्रम बताते हुए चेताया है कि सरकार अपनी आर्थिक नीतियों को ठीक करें वरना महंगाई का सैलाब आ जाएगा जनता सड़कों पर आ गई तो आपका राज्य चलना मुश्किल हो जाएगा इस समय पाकिस्तान सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि देश की चरमर आती अर्थव्यवस्था को सुधारना इमरान खान पहले ही आईएमएफ से लेने के खिलाफ थे इसके लिए वह मित्र देश सऊदी अरब और मलेशिया भी गए लेकिन उन्हें कोई खास नहीं मिली चीन जैसे मित्र ने भी मदद देने से इनकार कर दिया पिछले 5 वर्षों में पाकिस्तान का कर्ज़ 60 अरब डॉलर से 95 अरब डालर हो गया है बढ़ते कर्ज से परेशान पाकिस्तान ने एक बार फिर आईएमएफ की ओर मदद लेने का का हाथ बढ़ाया है

आईएमएफ पहले पाकिस्तान सरकार से आर्थिक संकट को दूर करने का वादा चाहता है इसके लिए उसने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं उनमें से कई शर्तें हां जैसे बिजली की कीमत में बढ़ोतरी ब्याज दर बढ़ाने और रुपए की कीमत कम करने का संग्रह दर को बढ़ाने पचोर लेकिन यह शर्त इतनी सकते हैं जिन पर पाकिस्तान अमल नहीं कर पाएगा इसलिए हो सकता है कि आई एम आप मदद देने से इनकार करते अमेरिका ने हमसे कहा है कि पाकिस्तान को मदद ना दी जाए क्योंकि उसे आशंका है कि पाकिस्तान इस धनराशि से चीन का कर्ज उतार एगा पाकिस्तान सरकार के 100 दिन पूरे होने के 1 दिन बाद ही विनिमय दर डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान रुपए के 145 के रिकॉर्ड के निचले स्तर पर पहुंच गया परेशानी है कि इमरान खान अब असमंजस में देख रहे हैं जब किसी देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह है लड़का आती है तो देश का शीर्ष नेतृत्व दिशाहीन हो जाता

जब किसी देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से बर्बाद होती है तो शीर्ष नेतृत्व भी विवेक हीन और बुद्धि हीन हो जाता है ऐसा ही इमरान खान के साथ हो रहा है चुनाव से पहले इमरान ने जो वादे जनता से किए थे वह अब पूरे होते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं इसलिए जनता मायूस हो रही है

इमरान खान ने चुनाव मोहित के समय पाकिस्तान में फैले भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने का नारा बुलंद किया था लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने ऐसे कई मंत्रियों के साथ केंद्रीय नेतृत्व अपना लिया जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं इमरान खान के देश में मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य भ्रष्ट गतिविधियों से प्रभावित तरीकों से निपटने के लिए एक नया कानून बनाए जाने की जरूरत महसूस करते हैं लेकिन सप्ताह के 100 दिन गुजरने के बाद भी कानून का प्रस्ताव संसद में पेश नहीं किया गया

किसी भी सरकार के लिए सबसे अच्छा तरीका विपक्ष के साथ तालमेल बढ़ाते हुए सत्ता को आगे बढ़ाना होता है लेकिन इमरान खान अभी तक ऐसा नहीं कर पाए पाकिस्तान में दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी राजनीतिक पार्टी पीपीपी आया है नासमझ प्रधानमंत्री से देश को नहीं संभाला जा रहा है चुनाव से पहले लाई कठपुतलियों से काम नहीं चलता आने वाले कुछ दिनों में आपको यह अंदाजा लग जाएगा

इमरान खान अपनी सरकार को किस तरीके से चलाते हैं और जनता की समस्याएं और बढ़ाते हैं