राहुल के ‘मिनिमम इनकम गारंटी’ पर बोली मायावती – कहा गरीबी हटाओ की तरह झूठा तो नहीं ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव 2019 जीतने के बाद हर गरीब मजदूर को ‘मिनिमम इनकम गारंटी’ का वादा यह सोच कर किया था कि चुनाव 2019 में जनता वोटों से लाद देगी. चुनाव मेे तो अभी तीन महीने दूर है, उससे पहले ही वह नेताओं के निशाने पर आ गए हैं. अब सभी विपक्क्ष नेता इसे ‘सिर्फ फैदे का सौदा’ बोल रहे है ताजा मामला BSP चीफ मायावती का है. बीएसपी चीफ मायावती ने कहा है कि राहुल गांधी का ‘मिनिमम इनकम गारंटी’ भी झूठा वादा है जैसा ‘गरीबी हटाओ’ था.

इतना ही नहीं उन्होंने राहुल गांधी के इस वादे की तुलना को मौजूदा सरकार से भी कर डाली. उन्होंने ये भी कहा, जिस तरह मौजूदा सरकार ने ‘अच्छे दिन’ ‘काला धन वापस लाने’ और ’15 लाख रुपए’ का वादा किया था, उसी तरह राहुल गांधी ने यह वादा किया है. और ये सारे वादे सिर्फ चुनाव की जीत के लिये है इसमे गरिबो का कोई फैयदा नही।

राहुल गांधी ने सोमवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ‘किसान आभार रैली’ को संबोधित करते हुए बड़ा बहुत बडा ऐलान किया था. उन्होंने ये कहा था कि, ‘हम एक ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहे हैं, जो दुनिया की किसी भी सरकार ने कभी नहीं लिया है. उनहोने कहा 2019 का चुनाव जीतने के बाद देश के हर गरीब को कांग्रेस पार्टी की सरकार न्यूनतम आमदनी की गारंटी देगी. हर गरीब व्यक्ति के बैंक खाते में न्यूनतम आमदनी रहेगी जिससे देश की गरीबी खतम होगी

आप को बता दें कि इससे पहले BJP सरकार में भी यूनिवर्सल बेसिक इनकम के तहत न्यूनतम इनकम गारंटी की वकालत हो चुकी है. लेकिन, राहुल गांधी के इस बड़े ऐलान के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर जहां चर्चाओं का दौर जारी है, तो वहीं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आ रही है.

अगर दूसरे शब्दों में बोले तो देश के हर नागरिक को एक तय समय पर तय रकम मिलेगी. इसमें उनकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति का कोई असर नहीं होगा. पहली बार 2016-17 के इकोनॉमिक सर्वे में इसका जिक्र हुआ था. अगर हम वर्ल्ड बैंक की नई सीमा के हिसाब से देखें तो हर शख्स को हर दिन 1.90 डॉलर (लगभग 135 रुपए) मिलने चाहिए. इस हिसाब से देखें तो 130 करोड़ की आबादी के लिए कुल 17,300 करोड़ रुपए का खर्च आएगा.

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