राजनीति में महाराणा प्रताप अकबर पर फिर संग्राम

“राजस्थान में भक्ति और शक्ति का संगम है”. ” सूरजमल का साहस महाराणा प्रताप का शौर्य पन्ना धाय का त्याग हाड़ा रानी का बलिदान दादू की वाणी मीरा की भक्ति सुनहरे रंग बिरंगे धोरे सुनहरी वाणी “

 

राजस्थान की रणभूमि जो वीरों की भूमि के नाम से प्रसिद्ध है उस भूमि के वीरों पर आज अंगुली उठाई जा रही है। वीर चाहे कोई हो जिसने अपनी रियासत और राज्यों को बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दी वह वीर वीर कहलाता है।

— वर्तमान राजस्थान में राज्य के मुद्दों की हद पार कर दी है एक और महाराणा प्रताप महान दूसरी अकबर महान हर सरकार अपना पासा फेंकने और युवा बेरोजगार धोखे की जड़ी में जूझ रहे हैं। विकास की रहा से हटकर विकास के मुद्दों से हटकर इन मुद्दों पर अपना विवश कर रही है शिक्षा को एक मोहरा बनाकर वोट बैंक बढ़ाना चाहती है। दुख इस बात का है राजस्थान के वीर मेवाड़ सिसोदिया राजघराने के महाराणा प्रताप जैसे वीरता के ऊपर आज भी अंगुली उठाई जा रही है।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री के बयान के बाद फिर से राज्य में संग्राम का बवाल खड़ा हो गया है वास्तविकता यह है कि बीजेपी के मूल वॉटर नाराज जिन्हें वह इस बयान के बाद कांग्रेस को गैर कर उनकी नाराजगी दूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।मुख्य मुद्दा= पिछली सरकार ने अकबर के आगे लगे महान को हटाकर महाराणा प्रताप के आगे महान लगाया गया तथा हल्दीघाटी में प्रताप की विजय हुई इस बात को भी स्पष्ट लेकिन वर्तमान सरकार इन तथ्यों को गलत बता कर ही आंकड़े अलग लेना चाहती है।

अब किताबों की जंग वर्तमान में राजनीतिक में उतर आई है. इधर वर्तमान विपक्षी दल का यह आरोप है कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस अपने वीरों का. स्वाद चखना चाहती है।