38 साल जेल के बाद लेंगे गजानंद मताधिकार का उपयोग।जानिए इनकी पूरी कहानी

जिंदगी का आधा हिस्सा पाकिस्तान की जेल में गुजारने के बाद गजानंद शर्मा भारत में लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लेने जा रहे है ।

जयपुर में माउंट रोड के स्थित फतेहराम टीबा के निवासी गजानंद शर्मा 7 दिसंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करते दिखेंगे। वह 38 साल बाद पाकिस्तान से भारत लौटे थे। यहां आते ही उन्होंने सबसे पहले अपना आधार कार्ड बनवाया। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपना वोटर कार्ड बनाने की अपील दर्ज करवाई जिसके बाद सोमवार को राजस्थान चुनाव आयोग ने गजानंद को उनका वोटर कार्ड दे दिया। गजानंद ने आखिरी बार 1980 में ब्यावर में मतदान किया था।

68 साल के गजानंद शर्मा पिछले 36 साल से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद थे। पहले उन्हें सिर्फ दो माह की सजा हुई थी लेकिन काउंसलर एक्सेस नहीं होने के कारण उन्हें 36 साल से जेल में बंद रखा गया । जेल से उनकी रिहाई 14 अगस्त को हुई। उन्हें 13 अगस्त 2018 को बाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान से भारत वापस लाया गया । हालांकि अभी तक ये साफ नही हुआ कि गजानंद किन परिस्थितियों में भारत की सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे ।पाकिस्तान पहुंचते ही स्थानीय पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। बहरहाल, पाकिस्तान ने अपने स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले सदभावना दिखाते हुए 30 भारतीयों को आज जेल से रिहा किया था जिनमें गजानंद भी शामिल थे।

दरहसल हुआ यूं कि साल 1982 में गजानंद शर्मा अपने परिवार के साथ अमृतसर के महारकलां गांव में रहते थे। अचानक एक रात वह गायब हो गए। काफी लंबे समय तक उनका कुछ पता नहीं चलने के बाद उनके परिवार वालो ने उन्हें मरा हुआ मान लिया था। इसके बाद गजानंद के परिवारवाले अमृतसर छोड़कर जयपुर आ गये । उनकी पत्नी मखनी देवी बीते 36 सालों से अब तक विधवा की जिंदगी गुजार रही थीं। इसी साल के 7 मई को सामेदा थाना पुलिस मखनी देवी के घर पहुंची और गजानंद के बारे में पूछताछ की। तब खुलासा हुआ कि गजानंद शर्मा पाकिस्तान की लाहौर सेंट्रल जेल में बंद हैं।