राम जी के लिए..आत्मा गदगद, शरीर रोमांचित, और आंख मे आंसू

sri ram

क्या हम भक्ति कर रहे हैं ? मेरा उद्देश्य किसी के हंसी मे व्यवधान उत्तपन्न करना नही है पर यदि आप भक्त है तो इस पोस्ट को जरूर पुरा पढे

आज मालिक के दया से हम भक्त है और भक्ति पर लगे है जिनमें परमात्मा कि चाहत है उन्हे कहने की जरूरत ही नही मुझ जैसा नीच बार बार ये भुल जाता है कि परमात्मा कि भक्ति कैसे हो
परमात्मा कहते हैsri ram

“बोली ठोली मस्खरी हसी खेल हराम
मद माया और नाचन गान संतो के नही काम!

हमारे मुंह से तो भुल से भी हंसी नही निकलनी चाहिए और मुझ जैसा नीच हंसी करता रहता है जितना भी हो सके परमात्मा लिए पोस्ट डाले हमारी मर्यादा तब चली जाती है जब हम परमात्मा भुल के हंसी ठिठोली करते है!

“हासे. गाये किन्हु ना मिलीया जीन मिलीया तीन रोये हासे गाये हरी मिले तो कौन दुहागण होय!!”

ये वाणी भक्त को बताती है कि हंसी ठिठोली तो हमे आनी ही नही चाहिए वो स्त्री पतिव्रता नही हो सकती जिसका पति दुर गया हो और वो अपने साथीयो के साथ हंसी ठिठोली करे?

जिस परमात्मा का नाम याद कर के आत्मा रोने जैसा हो जाये तो अगर हम हंसी कर रहे है क्या हम मालिक को दिल से चाहते ही नही बिल्कुल नही अगर आज हमारा हंसी करने का मजाक करने का मन है तो हममे सच्ची तडप नही है
ऐसी स्थिति मे हम सतलोक नही जा. सकते और ना समर्थ को पसंद आयेगी हजार लानत है हम पर जो हमारे मालिक के दुर होते हुए हम सांसारिक बातो पर खुश होकर दांत निपोरा करते है…..

सीता को भी राम छुड़ाने तब आये जब सीता पुरे मन से दुखी थी राम जी के लिए…..

गुरु जी सतसंग मे कहते है आज आपको हंसी आ रही है पर जब ये ज्ञान आपके हृदय मे बैठ जाएगा तब दिखाना आप हंस के चार लोग के साथ हंसना भी पड जाए ना दिल से हंसी नही आयेगी आपको बाहर से क्यो ना दांत दिखा दो पर हृदय. मे जगह नही आ पायेगी!

भक्तों मालिक से अरदास करो….

मालिक का ज्ञान दिल मे बैठे और परमात्मा का यदि नाम भी सुन ले तो मन व्याकुल, आत्मा गदगद, शरीर रोमांचित, और आंख मे आंसू आ जाए ऐसी स्थिति हमारी हो जाए!

सत साहेब जी.