याद आई है

याद आई है।
हां आज तेरी याद आई है।
काफी दिन गुजर गए।
मुझे तेरी बरबस याद आई है।
तेरी लिखे वो खत।
मुझसे लिपटी।
मेरे शहर में कैसी रुसवाई है।
लौट आओ मेरे मौसम.
मेरे सीने में धड़कते दिलो की रुसवाई है।

याद आई है।
हां आज तेरी याद आई है।
मैं आधा अधूरा हूँ खुद में।
मुकम्मल कैसें तेरे बिन मेरी परछाई है।
बेपर्दा मेरा ग़म मुझसे रूबरू कैंसे।
ऐ शब यह कैसी तनहाई है।
तुझे आज कागजों पर अपने शब्दों से जिंदा कर दू।
मेरे लब पर तेरी परछाई है।
मेरे सीने में धड़कती दिलों की रुसवाई है।

अवधेश कुमार  राय “अवध”

धनबाद

याद आई है