मुझे मार डालेगी ये तेरा इश्क़

मुझे मार डालेगी ये तेरा इश्क़

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कि अब बाहो़ में समा जाओ तो कोई बात बने मुझे मार डालेगी ये तेरा इश्क़ का अधूरा पन
इक बार खुल के बरस जाओ तो कोई बात बने तप रहा है तेरे इश्क़ के बुखार में बदन मेरा मुझपे सावन बनके छा जाओ तो कोई बात बने होंठ प्यासे हैं मेरे लब भी है  अजीब कशम कश में
मुझपे कभी जुल्फ़ भी फैलाओ तो कोई बात बने ज़ाम आँखों से पिला जाओ तो कोई बात बनेयूँ तो इश्क़ के सफ़र में तपिश भी बहुत है कुमार ज़ाम आँखों से पिला जाओ तो कोई बात बने शराब में वो तासीर कहाँ जो मुझे मदहोश कर देदूरी ना रहे कोई इतना करीब आ जाओ भी
इस तरह बाहों में समा जाओ तो कोई बात बने मुझे मार डालेगी ये तेरा इश्क़