दुनिया के सात अजूबे

taj mahal
ताज महल

दुनिया के 7 अजूबे , आखिर कौन तय करता है दुनिया के 7 अजूबे ? नमस्कार दोस्तो today my india में आपका स्वागत है चलिए जानते है।

आज हम जिन 7 अजूबो के बारे में जानते है उसे आधुनिक काल के 7 wonders कहा जाता है लेकिन क्या आपको पता है प्राचीन काल के भी 7 अजूबे थे, जी हां आपने सही पढ़ा 2200 साल पहले हेरोडोटस ओर कल्लिमचूस ने सबसे पहले दुनिया के 7 अजूबे तय किए थे जिनके नाम कुछ इस तरह है

● ऐलेक्जेन्ड्रिया का रोशनीघर
● गीज़ा के पिरामिड
● अर्टेमिस का मन्दिर
● बेबीलोन के झूलते बाग़
● माउसोलस का मकबरा
● जियस की मू्र्ति
● रोडेस कि विशालमूर्ति

प्राचीन काल के इन 7 अजूबो में से 6 नष्ट हो चुके है जिसमे से अब केवल गीज़ा के पिरामिड ही बचे है इसके बाद दुनिया मे कइयों ने अपने अपने हिसाब से 7 वंडर्स तय किये लेकिन ज़ाहिर सी बात है इसे पूरी दुनिया से स्वीकृति नही मिली इसके बाद स्विट्जरलैंड में न्यू 7 वंडर फाउंडेशन बनाया गया जिसने एक वेबसाइट द्वरा विश्व की 200 धरोहर की सूची वेबसाइट पर रखी जिनमे से दुनिया को 7 वंडर्स चुन ने थे चुनाव हुए, पूरी दुनिया ने अपने वोट डाले ये चुनाव 2007 तक चले आखिरकार 7 जुलाई 2007 को इसके परिणाम आये 7 वंडर फाउंडेशन के अनुसार पूरी दुनिया से 100 मिलियन वोट पड़े और 200 में से 7 को आधुनिक युग के 7 अजूबे चुना गया ।

1 चीन की दीवार

चीन की दीवार को दुनिया के 7 अजूबो में से एक गिना जाता है इस दीवार का निर्माण किसी एक राजा ने नही बल्कि चीन के कई अलग अलग शासको ने किया था इतिहास मे जाखने से पता चलता है कि उस समय लुटेरों का बहोत खोफ था इसी से बचने के लिए चीन के शासको ने ये दीवाल बनवाई थी, स्वाभाविक है कि दीवार बनाने में लाखों लोगों ने कठिन परिश्रम किया था लेकिन जो लोग दीवार बनाते हुए मारे गए उन को इसी दीवार में दफना दिया गया इसलिए इसे एक तरह से दुनिया का सबसे बड़ा कब्रस्तान भी कह सकते है इस दीवार के कुछ हिस्से आपस में जुड़े नही है समय ने अपना प्रभाव छोड़ा है कही कहि से ये दीवार टूट चुकी है ऊपर से हर जगह दीवार समान रुप से ऊंची नही है कही कही ये 35 फ़ीट तक उची है तो कही पे सिर्फ 8 फीट उची है।

the great wall of china
चीन की दीवार

आप सभी ने चीन की दीवार की ऐसी फ़ोटो तो बहोत देखी होगी लेकिन क्या आपने चीन की दीवार के अंत भाग को देखा है ?

end of the great wall of china
चीन की दीवार का आखरी छोर

ये है चीन की दीवार के अंत भाग की तस्वीर , चीन की दीवार के इस हिस्से को ओल्ड ड्रेगन के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि ऐसा लगता है मानो कोई ड्रेगन अपना मुह समुद्र में डूबा रहा है अपने आखरी भाग में चीन की दीवार बोहाई समुद्र पे खत्म होती है।

2 . चिचेन इटजा

chichen itza
चिचेन इट्ज़ा

मेक्सिको में स्थित चिचेन इट्ज़ा माया सभ्यता द्वारा बनाया गया है अगर आप इतिहास पढ़ने के शौकीन है तो माया सभ्यता के नाम से अनजान हो ही नही सकते अपने समय मे माया सभ्यता एक बहुत ही उन्नत सभ्यता मानी जाती थी जो कि बहोत अच्छे खगोलविद थे चिचेन इट्ज़ा वास्तुकला का अनमोल नमूना है यहां एक कुकुलकन का पिरामिड है जो कि 79 फ़ीट उचा ओर चारो दिशाओ में 91 सीढिया बनी हुई जिसकी हर एक सीढ़ी साल के एक दिन का प्रतीक मानी जाती है ,चिचेन इट्ज़ा को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया जा चुका है अगर आपको इतिहास से प्रेम है तो ये जगह पका आपको पसंद आएगी

3 क्राइस्ट द रिडीमर 

 

christ the reddemerक्राइस्ट द रिडीमर

क्राइस्ट द रिडीमर ब्राज़ील की पहचान है ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो शहर में कोरकोवाडो की पहाड़ी पर ईसा मसीह की प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई प्रतिमा के आधार सहित की गणना करे तो 38 मीटर है और वजन 635 टन है ।जिसका निर्माण 1922 से 1935 तक चला था सबसे पहले ऐसी कोई प्रतिमा बनाने का विचार 1850 में सुजाया गया,कैथोलिक पादरी पेड्रो मारिया बॉस ने उस समय की राजकुमारी ईसाबेल से ज़िक्र किया था लेकिन उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान नही दिया गया अंत मे दूसरी बार इसका विचार 1921 में एक कैथोलिक सर्कल द्वारा लाया गया इस समूह ने प्रतिमा बनाने के लिए दान जुटाने के लिए सेमाना डू मोनुमेंटो का आयोजन किया गया आखिर में ये कोशिश रंग लाई ,ये विशाल प्रतिमा बन के तैयार हुई ब्राज़ील में विदेशी पर्यटकों में ये प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है जो भी पर्यटक ब्राज़ील में आता है इस प्रतिमा को देखे बिना नही जाता।

4 रोम का कोलोसियम

rom colosseum
रोम का कोलोसियम

इटली में बसा हुआ रोम का कोलोसियम विशाल एलिप्टिकल एंफ़ीथियेटर है इसके निर्माण की शुरुआत
वेस्पियन ने की जबकि इसके आखरी भाग को पूरा
टाइटस ने किया इसमे उस समय करीब 50000 दर्शक बेठ सकते थे ये एक तरह से लाइव थियेटर था यहां लोगो का मनोरंजन के लिए योद्धाओ,केदियो ,ओर प्राणियों की लड़ाईया भी करवाई जाती नाटक ओर भव्य आयोजन भी इसी जगह होते थे ,लोग काफी संख्या में देखने आते थे अपने चरमकाल मे रोमन सभ्यता बहोत ताकतवर बनके उभरी थी ।

5  पेट्रा

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पेट्रा

जॉर्डन में बसा पेट्रा , पथर को काटकर बनाई गई अपनी कलाकृति के लिए जाना जाता है इसका निर्माण 312 बीसी में शुरू हुआ था इस पर नाबतियन ओर रोमन साम्राज्य ने राज किया था पेट्रा को रोज़ सिटी भी कहा जाता है क्योंकि इस शहर के चटानो के रंग सूर्योदय ओर सूर्यास्त के समय लाल रंग के होते प्रतीत होते है

petra
पेट्रा

पेट्रा के चटाने काटकर बनाई गई कलाकृति देखने मे अपने आप मे एक लहावा है वर्ष 1812 में स्विस खोजकर्ता जोहान लुडविग बुकहार्ट ने इस शहर की खोज की थी 1985 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था

6 माचू पिचू

machu pichu
माचू पिचू

माचू पिचू इंडस माउंटेन के ऊपर बसा है जो कि पेरू नामक देश मे है जिसे इंकाओं का खोया शहर भी कहा जाता है माचू पिचू इंका सभ्यता से जुड़ा हुआ है लेकिन स्पेनिशो की जीत के कारण इंका सभ्यता को इसे गवाना पड़ा स्पेनिशो ने इंका सभ्यता के कलाकृतियों को भारी नुकसान पहोचाय लेकिन वे लोग इसे खोज नही पाए बाद में 1911 में इतिहासकार हिरम बिंघम ने यहां गए और उन्होंने ही माचू पिचू को दुनिया में प्रसिद्धि दिलाई ये जगह अपने प्राकृतिक और इतिहास के कारण प्रसिद्ध है 1983 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया

7 ताज महल

taj mahal
ताज महल

इसके बारे में तो आप जानते ही होंगे आगरा में स्थित ताज महल दुनिया भर में मशहूर है मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में इसका निर्माण करवाया था ताजमहल के आर्किटेक उस्ताद अहमद लाहोरी ओर उस्ताद इसा थे 1632 में ताजमहल का निर्माण शुरू किया गया था जो कि 1635 तक चला मुमताज महल की मौत के बाद उसे यही पे दफनाया गया था ताजमहल को बनाने में भारी खर्चा हुआ था जैसे ही ताजमहल का काम पूर्ण हुआ शाहजहाँ के बेटे ओरंगजेब ने उनको पद से हटा दिया था शाहजहाँ के मौत के बाद उनको भी उनकी बेगम मुमताज महल के पास ही दफना दिया गया ,ताजमहल देखने हर साल लाखों सैलानी आते है जिसे यूनेस्को ने 1983 में ताजमहल को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया ।