क्यों पानी में डूबने से होगा पूरी दुनिया का अंत।

 क्यों होगा पानी में डूबकर दुनिया का अंत ? जाने पूरी सच्चाई।

कुछ ऐसे ही तस्वीरे सोशल मिडिया पर देखी जा रही है।

आज भी ये एक राज बना हुआ है कि कैसे होगा दुनिया का अंत इसके लिए कई सारे भावनाए और भविष्यवानिया की गयी की भारत का अंत प्रलय से होगा सुनामी आएगी और भी बहुत कुछ पर असल में देखा जाये तो पूरी दुनिया धीरे-धीरे प्रलय की कगार पर पहुच रही है । कहने को तो ये आप सबको अजीब लगेगा पर ये सच्चाई होते जा रही है की दुनिया का अंत पानी में डूबने से होने की आशंका है। ये कोई भविष्यवाणी तो नही है पर ये एक सच बने जा रहा है। कई समाचार चैनलो (NEWS  CHANNEL) में ये बताया गया है कि दुनिया का अंत डूबने से हो सकता हैं।

क्या है डूबने का कारण आखिर क्यों होगा ऐसा?

आंटार्टिक और अंटार्कटिक दोनों ध्रुवो पर नजर रखने वाले नासा (NASA) के उपग्रहो के (deta) के अनुसार उस उपग्रह से हाल ही में कुछ चोकाने वाली मत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी है। नासा का उपग्रह पिछले 23 सालों से दोनों ध्रुवो की हर तरीके से तस्वीरे खिंच कर दे रहा है। जिससे नासा के वैज्ञानिकों ने ये साझा किया है कि अर्टिक उत्तरी ध्रुव और अंटार्कटिक दक्षिणी की खिंची हुई तस्वीरे के मोताबिक ये सांझा किया है कि बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग से इंसानों और वातारण पर काफी प्रभाव पड़ रहा है।

हाल के सालों में दोनों ध्रुव में ये देखा जा रहा है कि दोनों ध्रुवो के बर्फ का पिघलना धीरे-धीरे बहुत बड़ा चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। देखा जाये तो अर्टिक की तुलना में बर्फ बहुत तेजी से पिघलती जाती हैं। एक शोध के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया है कि 70 के दशक के आखिरी के समय से यह अनुमान लगाया हे की यहाँ हर साल करीब (एक लाख बिस हजार आठ सौ) स्क्वेर मील की बर्फ तेजी से पिघलती जा रही हैं। वेज्ञानिको का कहना है कि भूमंडलीय तापमान के बढ़ोतरी के कारण दोनों ध्रुवो की बर्फ तेजी से पिघलती जा रही हैं।

कुछ लोगो का तो ये भी कहना है की पिछले कई सालों से बर्फ के मात्राओं में कई नई जगहों पर बर्फ बनने की तेजी भी देखी जा रही हैं। हालांकि अभी तक बर्फ बढ़ने की अभी तक कोई सही वजह सामने नही आ पायीं हैं। पर नासा ने जानकारी दी है की नासा के deta के मुताबिक 70 के दशक के अंत से बर्फ की बढ़ोतरी में (तीन हजार तीन सौ) स्क्वेर मील छेत्र में हर्फ़ तेजी से बढ़ रही हैं। परंतु अभी तक वेज्ञानिको को ये मालूम नही पड पाया हैं कि नए इलाको में जो बर्फ बढ़ते जा रही हैं। आखिर उसकी मोटाई कितनी हैं। क्योकि बर्फ की मोटाई नापने का तरीका अभी तक सामने नही आ पाया हैं।

पर वेज्ञानिको के लिए एक और बहुत बड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है कि दोनों ध्रुवो के बीच में दुनिया का 75% पिने का पानी हैं। जो की चिंता का विषय दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। इसी प्रकार ये अनुमान लगाया जा चूका है कि इसका कोई हल सामने नही आ आया तो शायद पूरी दुनिया पर इसका खतरा बहुत गंभीर हो सकता हैं। और बर्फ पर रहने वाले जिव जंतुओं को भी कई तरह के नुकसान हो सकता हैं।